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खुशखबरी ! पू० श्रीज्ञानमती माताजी ससंघ कतारगाँव में भगवान आदिनाथ मंदिर के प्रांंगण में विराजमान हैं|

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To absorbe into self-consciousness. निश्चय रत्नत्रय द्वारा स्वयं साधक रूप से परिमाणित होना।