ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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इस मंत्र की जाप्य दो दिन 16 और 17 तारीख को करे |

सोलहकारण व्रत की जाप्य - "ऊँ ह्रीं अर्हं संवेग भावनायै नमः"

अकर्ता

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अकर्ता
Undoer. किसी कार्य को न करने का भाव.लोक में एक वास्तु का अन्य वास्तु के साथ संपूर्ण सम्बन्ध का निषेध किया है,इसलिए वस्त्रू स्वरु[प परद्रव्य का अकर्ता ही है।