ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

Whatsappicon.jpg
Whatsappicon.jpg
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्ज एप पर मेसेज करें|

परम पू. ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में सिद्धचक्र महामंडल विधान (आश्विन शुक्ला एकम से आश्विन शुक्ला नवमी तक) प्रारंभ हो गया है|

अजित सागर जी महाराज

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज



अजित सागर जी महाराज का संक्षिप्त परिचय

Bhi1033.jpg

(१) पूज्यश्री का नाम -मुनि श्री अजित सागर जी महाराज


(२) जन्मस्थान - सिमरिया—गढ़ाकोटा (सागर) म. प्र.


(३) जन्मतिथि व दिनाँक - १७ अप्रैल १९९८, बैशाखकृष्णा—पंचमी


(४) जाति - परवार


(५)(A) माता का नाम श्रीमति ताराबाई जैन

(B) पिता का नाम श्री कोमलचंद जैन


(६) लौकिक शिक्षा - हाईस्कूल


(७) आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत/प्रतिमा-व्रत ग्रहण करने का विवरण - २७ दिसम्बर, १९८७ ललितपुर , ५ जून, १९८९ को द्वितीय प्रतिमा के व्रत, सन् १९८९ पाश्र्वनाथ निर्वाण महोत्सव को तीसरी प्रतिमा, और वजनवदी १९९३ जबलपुर में १० वीं प्रतिमा


द्वारा - परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज


(८) क्षुल्लक/क्षुल्लिका दीक्षा तिथि, दिनाँक व स्थान - २० अप्रैल, १९९६ (अक्षय तृतीया) सिद्धक्षेत्र तारंगाजी, सागर (महा.)

क्षुल्लक/क्षुल्लिका दीक्षा गुरु - परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज


(९) ऐलक दीक्षा तिथि, दिनाँक व स्थान -५ जनवरी, १९९८ सिद्धोदय सिद्धक्षेत्र नेमावर, (देवास) म. प्र.

ऐलक दीक्षा गुरु -परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज


(१०) मुनि दीक्षा तिथि, दिनाँक व स्थान - २२ अप्रैल १९९९ गुरुवार बैशाख शुक्ला सप्तमी सिद्धोदय सिद्धक्षेत्र नेमावरजी (देवास) म. प्र.

मुनि दीक्षा गुरु - परम पूज्य आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज


(११)साहित्यिक कृतित्व -. १. भीतर कहीं (भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित), २. महाश्रमण, ३. विद्याशांति, ४. परमेष्ठी स्तव, ५. तीर्थंकर स्तव, ६. ज्ञानोदयसार,७. वीरदेशना, ८. विद्यावाणी, ९. पर्यूष वाणी, १०. अिंहसासूत्र, ११. मानस मोती भाग—१, १२. मानस मोती भाग—२, १३. साधनापक्ष का पाक्षेय,१४. सल्लेखना समत्व की साधना पद्यानुवाद, १५. कल्याण मंदिर स्तोत्र विधान, १६. एकीभाव स्तोत्र विधान, १७. विषायहार स्तोत्र, परिचय संग्रह १८. आचार्य श्री विद्यासागर की चेतन कृति।


(१२)शिष्यों की संख्या -

आचार्य की संख्या-
उपाध्याय की संख्या-
मुनि की संख्या-
गणिनी की संख्या-
आर्यिका की संख्या-
ऐलक की संख्या-
क्षुल्लक की संख्या-.
क्षुल्लिका की संख्या-
ब्रह्मचारी भाई की संख्या-
ब्रह्मचारिणी बहनें की संख्या-
अन्य संख्या-


(१३)अन्य विशेष जानकारी - मुनिश्री सान्निध्य में अब तक—१२ पंचकल्याणक गज रथ महोत्सव क्रमश ७ लघुपंचकल्याणक का २६ नगरों में वेदी प्रतिष्ठायें। ६ नगर में कल्पद्रुम मंडल विधान, ७ सिद्धचक्र विधान, ५ जगह १६ त्रसीय शांति विधान/ नंदीश्वर विधान, चौबीसी विधान हुये, १२ नगरों में वेदी शिलान्यास, २५ नगरों के मंदिरों को जीर्णोद्धार हुआ है कुछ का हो रहा है करीब ३०—३५ नगरों में जैनपाठशालायें संचालित कराई। और भी अनेक कार्य।


(१४)संघ का संपर्क़ सूत्र (मोबाइल, फोन, ईमेल) - बा. ब्र. रविन्द्र जैन कोटा—०९४०६९६३६६६ बा. ब्र. पवन जैन ललितपुर—०९४०६९६३५५५