ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

Whatsappicon.jpg
Whatsappicon.jpg
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्ज एप पर मेसेज करें|

20 सितम्बर 2017 आश्विन क्रष्णा अमावस्या को आचार्य श्री वीरसागर महाराज की 60वीं पुण्य तिथि मनाएं|

अज्ञान :

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अज्ञान :

अज्ञान :

अज्ञानात् ज्ञानी, यदि मन्यते शुद्धसम्प्रयोगात्।

भवतीति दु:खमोक्ष:, परसमयरतो भवति जीव:।।

—समणसुत्त : १९४

अज्ञानवश यदि ज्ञानी भी ऐसा मानने लगे कि शुद्ध सम्प्रयोग अर्थात् भक्ति आदि शुभभाव से दु:ख—मुक्ति होती है, तो वह भी राग का अंश होने से परसमयरत होता है।

जल बुब्बयसारिच्छं धनजोव्वण जीवियं पि पेच्छंता।

मण्णंति तो वि णिच्चं अइवलिओ मोहमाहप्पो।।

—द्वादशअनुप्रेक्षा : २१


धन, यौवन और जीवन को जल के बुलबुले के समान देखते हुए भी मनुष्य उन्हें नित्य मानता है, यह बड़ा आश्चर्य है। मोह का माहात्म्य अति बलवान है।