ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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प्रथामाचार्य श्री शांतिसागर महाराज की 62 वीं पुण्यतिथि (भाद्रपद शुक्ला दुतिया) 23 अगस्त को मुंबई के जैनम हाल में पूज्य गणिनी ज्ञानमती माता जी के सानिध्य में मनायी जाएगी जैन धर्मावलंबी अपने-अपने नगरों में विशेष रूप से इस पुण्यतिथि को मनाकर सातिशय पुण्य का बंध करें|
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इस मंत्र की जाप्य दो दिन 22 और 23 तारीख को करे |

सोलहकारण व्रत की जाप्य - "ऊँ ह्रीं अर्हं साधुसमाधि भावनायै नमः"

अट्ठाईस मूलगुण व्रत

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अट्ठाईस मूलगुण व्रत

व्रतविधि— साधु के २८ मूलगुणों के २८ व्रत किये जाते हैं। इन व्रतों में उपवास या एकाशन जैसी भी शक्ति हो, कर सकते हैं।

समुच्चय मंत्र-ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय अष्टाविंशतिमूलगुणेभ्यो नम:।


पृथक्-पृथक् व्रत के मंत्र—

१. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय अहिंसामहाव्रताय नम:।

२. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय सत्यमहाव्रताय नम:।

३. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय अचौर्यमहाव्रताय नम:।

४. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय ब्रह्मचर्यमहाव्रताय नम:।

५. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय अपरिग्रहमहाव्रताय नम:।

६. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय ईर्यासमितये नम:।

७. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय भाषासमितये नम:।

८. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय एषणासमितये नम:।

९. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय आदाननिक्षेपणसमितये नम:।

१०. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय उत्सर्गसमितये नम:।

११. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय स्पर्शनेन्द्रियनिरोधव्रताय नम:।

१२. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय रसनेन्द्रियनिरोधव्रताय नम:।

१३. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय घ्राणेन्द्रियनिरोधव्रताय नम:।

१४. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय चक्षुरिन्द्रियनिरोधव्रताय नम:।

१५. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय श्रोत्रेन्द्रियनिरोधव्रताय नम:।

१६. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय समतावश्यकक्रियायै नम:।

१७. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय चतुर्विंशतिस्तवावश्यकक्रियायै नम:।

१८. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय वंदनावश्यकक्रियायै नम:।

१९. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय प्रतिक्रमणावश्यकक्रियायै नम:।

२०. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय प्रत्याख्यानावश्यकक्रियायै नम:।

२१. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय कायोत्सर्गावश्यकक्रियायै नम:।

२२. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय केशलोंचमूलगुणाय नम:।

२३. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय आचेलक्यमूलगुणाय नम:।

२४. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय अस्नानमूलगुणाय नम:।

२५. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय क्षितिशयनमूलगुणाय नम:।

२६. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय अदंतधावनमूलगुणाय नम:।

२७. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय स्थितिभोजनमूलगुणाय नम:।

२८. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय एकभक्तमूलगुणाय नम:।