वीर निर्वाण संवत 2544 सभी के लिए मंगलमयी हो - इन्साइक्लोपीडिया टीम

Whatsappicon.jpg
Whatsappicon.jpg
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें|


22 अक्टूबर को मुंबई महानगर पोदनपुर से पू॰ गणिनी ज्ञानमती माताजी का मंगल विहार मांगीतुंगी की ओर हो रहा है|

अट्ठाईस मूलगुण व्रत

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अट्ठाईस मूलगुण व्रत

व्रतविधि— साधु के २८ मूलगुणों के २८ व्रत किये जाते हैं। इन व्रतों में उपवास या एकाशन जैसी भी शक्ति हो, कर सकते हैं।

समुच्चय मंत्र-ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय अष्टाविंशतिमूलगुणेभ्यो नम:।


पृथक्-पृथक् व्रत के मंत्र—

१. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय अहिंसामहाव्रताय नम:।

२. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय सत्यमहाव्रताय नम:।

३. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय अचौर्यमहाव्रताय नम:।

४. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय ब्रह्मचर्यमहाव्रताय नम:।

५. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय अपरिग्रहमहाव्रताय नम:।

६. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय ईर्यासमितये नम:।

७. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय भाषासमितये नम:।

८. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय एषणासमितये नम:।

९. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय आदाननिक्षेपणसमितये नम:।

१०. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय उत्सर्गसमितये नम:।

११. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय स्पर्शनेन्द्रियनिरोधव्रताय नम:।

१२. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय रसनेन्द्रियनिरोधव्रताय नम:।

१३. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय घ्राणेन्द्रियनिरोधव्रताय नम:।

१४. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय चक्षुरिन्द्रियनिरोधव्रताय नम:।

१५. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय श्रोत्रेन्द्रियनिरोधव्रताय नम:।

१६. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय समतावश्यकक्रियायै नम:।

१७. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय चतुर्विंशतिस्तवावश्यकक्रियायै नम:।

१८. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय वंदनावश्यकक्रियायै नम:।

१९. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय प्रतिक्रमणावश्यकक्रियायै नम:।

२०. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय प्रत्याख्यानावश्यकक्रियायै नम:।

२१. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय कायोत्सर्गावश्यकक्रियायै नम:।

२२. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय केशलोंचमूलगुणाय नम:।

२३. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय आचेलक्यमूलगुणाय नम:।

२४. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय अस्नानमूलगुणाय नम:।

२५. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय क्षितिशयनमूलगुणाय नम:।

२६. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय अदंतधावनमूलगुणाय नम:।

२७. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय स्थितिभोजनमूलगुणाय नम:।

२८. ॐ ह्रीं सकलचारित्रलाभाय एकभक्तमूलगुणाय नम:।