ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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अत्यंत गंभीरता से ले स्पांडिलाइटीस को

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अत्यंत गंभीरता से ले स्पांडिलाइटीस को

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गर्दन में होने वाले दर्द को 'सरवाइकिल' स्पांडिलाइटिस तथा कमर के दर्द को 'लम्बर स्पांडिलाइटिस' कहा जाता है | मुख्यतः वह परेशानी अनियमित खानपान, गलत रूप से बैठने तथा कमजोरी के कारण होती है पर इससे बचाव हेतु ये उपाय अपनाए-
स्वयं को सक्रिय जरुर रखे, किसी भी प्रकार का कार्य न करना भी कमर के स्नायुओ को कमजोर करता है, जिससे दर्द पनपता है|
रीढ गर्दन से प्रारंभ होकर कमर के नीचे तक फ़ैल कर हमें हिलना का कार्य कराती है | और कार्य करने में झटको को यही सहती है , अतः ध्यान रखे
कि इन पर ज्यादा भार न पड़े वरना स्पांडिलाइटिस का दर्द शुरू हो जाएगा |
यह दर्द कई बार आनुवांशिक रूप में भी मिलता है यानि पिता या माता को यह है तो पुत्र में इसके होने कि संभावना सर्वाधिक होती है | मानसिक रूप से किसी भी बड़े तनाव से खुद को दूर रखे क्यूंकि मस्तिष्क की कोशिकाएं इससे जुडी होती है|
बढती उम्र में इसके होने की ज्यादा प्रबलता रहती है क्यूंकि उम्र बदने से यह रीढ के यह मोती घिसते जाते है|
शरीर में कुछ हिस्सों में होने वाली विशेष बीमारियाँ भी जैसे पथरी , पेक्रियास ग्लैंड की सूजन तथा ओवरी की सूजन आदि से भी स्पांडिलाइटिस हो
जाता है| इसलिए ऐसी बीमारी हो तो पूरी तरह से इलाज करवाए|
ऑफिस में लगातार कुर्सी पर बैठकर किसी काम को करना, किताब पड़ना आदि वजहे भी यह दर्द पैदा करती है| इनसे बचे|
स्पांडिलाइटिस को रोकने के लिए चलने-फिरने, सोने, उठने-बैठने आदि आदतों में फिरने, सोने उठने-बैठने आदि में बदलाव करे|
किसी भारी सामान को जबरन उठाने से बचे| जरूरी हो तो धकेलने का प्रयास करे | किसी सामान को जमीन से उठाते वक्त झुकाव कमर पर नहीं ,
घुटनों पर ले| चलने के समय कदमो की लम्बाई सामान्य व आरामदेह रखे तथा हाथो को भी ऐसा ही रखे|
अगर ज्यादा समय तक खड़ा रहना है तो इक पैर दुसरे से थोडा ऊंचा रखे| इक से खड़े न रहकर स्थिति बदलते रहे| गाडी चलाते समय भी स्टेयरिंग
से ज्यादा दूरी न रखे| अपने खाने-पीने में बर्गर, पिज्जा, कोल्डड्रिंक आदि में थोडा परहेज करे| पेट के बल सोने से बचे | जरुरी हो तो कमर के नीचे
नर्म तकिये का उपयोग करे| शरीर में प्रमुख पोषक तत्व कैल्शियम की मात्र सही रखे| इसकी कमी स्पांडिलाइटिस का कारण होती है| शरीर को भरपूर्ण
नींद दे और शारीरिक क्षमता से ज्यादा कार्य न करे| शरीर के वजन पर भी नियंत्रण रखे| यह कद के अनुसार ही करे|
स्पांडिलाइटिस होने पर चिकित्सक की रायनुसार नियमित रूप से व्यायाम करते रहे|