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अथ श्रावण मास फल विचार

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ग्रह स्पष्ट कु. श्रावण कृ. ७ शनिवार प्रात: ५ घं. 30 मि. केतकी अहर्गण: २६७७
अथ श्रावण मास फल विचार
ग्रह स्पष्ट कु. श्रावण कृ. 30 शनिवार प्रात: ५ घं. 30 मि. केतकी अहर्गण: २६८४
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दोहा-
श्रावण मास में कभी शनि पांच रविवार |
छत्र भंग दुर्भिक्ष दुःख इसमें नहीं विचार ||
श्रावण दसमी तमभरी नखत रोहिणी होय |
काल पड़े जग दुःख सहे विकल रहै सब कोय ||
श्रावण कृष्ण पक्ष देख पड़वा श्रावण धनेष्ठ | हो तो निश्चय जान लो सम्वत होय श्रेष्ठ ||
सावन सातै शनिश्चर, पृथ्वी हो जल पूर | जंगल हो मखमल सा नाचै वहां मयूर ||
सूर्य चन्द्र बुध राहु का बना कर्क पर योग | वर्षा अथवा युद्ध से दुःख पावै सब लोग ||
श्रावण मास जब कभी सुदी चौथ घट जाय | ग्राहक मांगें मूंग घी विक्रेता नट जाय ||
आगू तो सूरज चले पीछे चले है राहु | इन बीच बुध जब आ मिले तब अन्न मूंगो बिकाय ||
   शुक्रवार के दिन कभी सूर्य संक्रमण होय | हाथी घोड़ा ऊंट गुड़ में महंगापन होय ||
ईख शर्करा मिष्ट रस गुड़ हल्दी तिल तेल | सोना तांबा तेज हों सूर्य सिंह के मेल ||
क्रूरवार तेजी करै मावस पूनम का राज | मास नखत पूनम नहीं तेज बिकै अनाज ||
बिना श्रावण की श्रावणी बिगड़ी अगली चाल | गजेन्द्र जैन वर्णन करै समझावें जीयालाल ||
|| इति श्रावण मास फल सम्पूर्ण ||