ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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सोलहकारण व्रत की जाप्य - "ऊँ ह्रीं अर्हं वैय्यावृत्त्यकरण भावनायै नमः"

अथ श्रीगोमुखयक्ष स्तोत्रम्

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अथ श्रीगोमुखयक्ष स्तोत्रम्

श्रीनाभिनंदन जिनेश्वर शासनस्य।रक्षाकरो दुरित संहति नाश दक्षः।।

प्राग्गोमुखो वृषमुखो वृषभो वृषांकः। जीयात्सदा शुभकरो वृषभेश यक्षः।।१।।

श्रीमच्चतुर्भुज सुशोभित बीजपूरः।हस्ते स्पुरद् परशुकांत शुभाक्षसूत्रः।।
स्वर्णाभकान्ति वरदान परः स्वशीष्र्ण । धर्मिष्ठ चक्रधर आदिजिनेन्द्रभक्तः ।।२।।

श्वासज्वरक्षयकफोग्रभगंदरार्ति।श्लैष्मातिसारकुजलोदरकासमुख्याः।।
रोगाः प्रयान्ति विलयं स्मरतां जनानाम् । जीयात्सदा शुभकरो वृषभेश यक्षः।।३।।

मत्तेभसिंहफणिराजदवानलोग्र। युद्धाम्बुनायकमहोदरबंधनानाम् ।।
भीतिर्नवैयदभिधां स्मरतां जनानाम् । भद्रप्रदो भवतु नो वृषभेश यक्षः।।४।।

सप्रेतभूतकपिशाचकुदृष्टिशाकि-न्यद्गाढमुद्गलबलप्रविनाशवीरः।।
यो यक्षनाथ इह देवगणाधिनाथः। दोषौघनाशनकरो वृषभेश यक्षः।।५।।

आनंद लक्ष्मीवर वाणि सुराज्य राजी।वालभ्य भोग महिमादिनिधानदायी।।
सम्पूर्ण निर्मलयशः सुसमृद्धिवृद्धि । वृन्दं करोतु सततं वर गोमुखेशः।।६।।

सत्कीर्ति वीर सुमहोदय सत्प्रमोद।रत्नप्रकाश गुणवर्ग भृतां जनानाम् ।।
चव्रेश्वरी तव सुशोभित वामभागम् । कुर्याच्छुभं मम सदा वृषभेश यक्षः।।७।।

सद्दानदाढ्र्य सुदया सुभगत्व भाजाम् । सन्मुक्ति पूर्विमलमार्ग समुत्सुकानाम् ।।
श्रीमज्जिनेन्द्र वरधर्म परायणानाम् ।दद्यात्सुखं स सततं वृषभेश यक्षः।।८।।

ॐ आं क्रों ह्रीं श्रीगोमुखयक्षेश्वराय स्तोत्राऽघ्र्यं समर्पयामीति स्वाहा।।
घत्ता
इति गुणगणशीलं नीतिनिःशेषलीलम् ।
विजितरिपुसमूहं शुद्धसम्यक्त्वमूलम् ।।
जगतिजनसुवंद्यं सिद्धबुद्धैकनन्द्यम्।
भजतवृषभयक्षं केवलंशांतरूपम् ।।
अथ विसर्जनम्
शुभ्राक्षत प्रसवसत्कुलरत्नदीपैः।
माणिक्यरत्नमयकांचनभाजनस्थैः।।
श्रीगोमुखेचरणतामरसद्वयागे्र।
सन्मंगलार्तिकमहं त्ववतारयामि।।
इति मंगलारार्तिकोद्धारणं करोमि स्वाहा।
धनदा वरदा सुरपती श्रीगोमुख सुरराज।
सेवकजन सुखियाकरे सारे वांछितकाज।।
इति श्रीगोमुखयक्षपूजा सम्पूर्णा।