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अथ सर्वदोषप्रायश्चित्तविधि:

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अथ सर्वदोषप्रायश्चित्तविधि:

ॐ ह्रीं अर्हं असिआउसा त्रयस्त्रिंशदत्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।१।।


ॐ ह्रीं अर्हं अहिंसामहाव्रतस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।२।।

ॐ ह्रीं अर्हं सत्यमहाव्रतस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।३।।

ॐ ह्रीं अर्हं अचौर्यमहाव्रतस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।४।।

ॐ ह्रीं अर्हं ब्रह्मचर्यमहाव्रतस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।५।।

ॐ ह्रीं अर्हं अपरिग्रहमहाव्रतस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।६।।

ॐ ह्रीं अर्हं ईर्यासमिते-रत्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।७।।

ॐ ह्रीं अर्हं भाषासमिते-रत्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।८।।

ॐ ह्रीं अर्हं एषणासमिते-रत्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।९।

ॐ ह्रीं अर्हं आदाननिक्षेपणसमिते-रत्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।१०।।

ॐ ह्रीं अर्हं उत्सर्गसमिते-रत्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।११।।

ॐ ह्रीं अर्हं मनोगुप्ते-रत्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।१२।।

ॐ ह्रीं अर्हं वचोगुप्ते-रत्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।१३।।

ॐ ह्रीं अर्हं कायगुप्ते-रत्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।१४।।

ॐ ह्रीं अर्हं जीवास्तिकायस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।१५।।

ॐ ह्रीं अर्हं पुद्गलास्तिकायस्या-त्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।१६।।

ॐ ह्रीं अर्हं धर्मास्तिकायस्या-त्यासादना-त्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।१७।।

ॐ ह्रीं अर्हं अधर्मास्तिकायस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।१८।।

ॐ ह्रीं अर्हं आकाशास्तिकायस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।१९।।

ॐ ह्रीं अर्हं पृथ्वीकायिकस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।२०।।

ॐ ह्रीं अर्हं अप्कायिकस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।२१।।

ॐ ह्रीं अर्हं तेजःकायिकस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।२२।।

ॐ ह्रीं अर्हं वायुकायिकस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।२३।।

ॐ ह्रीं अर्हं वनस्पतिकायिकस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठित-प्रोषधोद्योतनाय नमः।।२४।।

ॐ ह्रीं अर्हं त्रसकायिकस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।२५।।

ॐ ह्रीं अर्हं जीवपदार्थस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।२६।।

ॐ ह्रीं अर्हं अजीवपदार्थस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।२७।।

ॐ ह्रीं अर्हं आस्रवपदार्थस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।२८।।

ॐ ह्रीं अर्हं बंधपदार्थस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।२९।।

ॐ ह्रीं अर्हं संवरपदार्थस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।३०।।

ॐ ह्रीं अर्हं निर्जरापदार्थस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।३१।।

ॐ ह्रीं अर्हं मोक्षपदार्थस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।३२।।

ॐ ह्रीं अर्हं पुण्यपदार्थस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।३३।।

ॐ ह्रीं अर्हं पापपदार्थस्यात्यासादनात्यागायानुष्ठितप्रोषधोद्योतनाय नमः।।३४।।

ॐ ह्रीं अर्हं सम्यग्दर्शनाय नमः।।३५।।

ॐ ह्रीं अर्हं सम्यग्ज्ञानाय नमः।।३६।।

ॐ ह्रीं अर्हं सम्यक्चारित्राय नमः।।३७।।