ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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अदृष्ट

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अदृष्ट
Invisible, Providential, Past karmas. अदृश्य,दिखाई न देना ।

या
Unperceived; unobserved; an infraction of paying reverence to the preceptors. गुरु की दृष्टि से ओझिल होकर अथवा पिच्छी से प्रतिलेखना न करके न करके वंदना करना अदृष्ट दोष है ।