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पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ ऋषभदेवपुरम्-मांगीतुंगी में विराजमान है ।

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अनंतचतुष्टय

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अनंतचतुष्टय
Four-excellences of Jaina Lord (infinite conation-knowledge, bliss & power). अनंतदर्शन ,अनंतज्ञान ,अनंत सुख और अनंतवीर्य ये ४ मुख्या गुण केवली अरहंत पर्मात्र्मा के प्रगट होते हैं ।