ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

Whatsappicon.jpg
Whatsappicon.jpg
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्ज एप पर मेसेज करें|

पूज्य गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माता जी के द्वारा अागमोक्त मंगल प्रवचन एवं मुंबई चातुर्मास में हो रहे विविध कार्यक्रम के दृश्य प्रतिदिन देखे - पारस चैनल पर प्रातः 6 बजे से 7 बजे (सीधा प्रसारण)एवं रात्रि 9 से 9:20 बजे तक|
इस मंत्र की जाप्य दो दिन 18 और 19 तारीख को करे |

सोलहकारण व्रत की जाप्य - "ऊँ ह्रीं अर्हं शक्तितस्त्याग भावनायै नमः"

अनशन :

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


अनशन :

मासे मासे तु यो बाल:, कुशाग्रेण तु भुङ्क्ते।

न स स्वाख्यातधर्मस्य, कलामर्घति षोडशीम्।।

—समणसुत्त : २७३

जो बाल (परमार्थशून्य अज्ञानी) महीने—महीने के तप करता है और (पारणे में) कुश के अग्रभाग जितना (नाममात्र का) भोजन करता है, वह सुआख्यात धर्म की सोलहवीं कला को भी नहीं पा सकता।

सो नाम अणसण तवो, जेव मणो मंगुलं न चिन्तेइ।

जेण न इंदियहाणी, जेण य जोगा न हायंति।।

—मरण—समाधि : १३४

वही अनशन तप श्रेष्ठ है जिससे कि मन अमंगल न सोचे, इन्द्रियों की हानि न हो और नित्य—प्रति की योग—धर्म क्रियाओं में विघ्न न आए।