ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा देश के समस्त जैन विद्वानों के लिए विशेष सैद्धांतिक विषयों पर ऋषभगिरि-मांगीतुंगी से विद्वत प्रशिक्षण शिविर का पारस चैनल पर ४ दिसंबर, रविवार से ११ दिसंबर २०१६, रविवार तक प्रातः ६ बजे से ७ बजे तक सीधा प्रसारण होगा | घर बैठे देखकर अवश्य ज्ञान लाभ लें |

अनासक्ति :

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अनासक्ति :

एतांश्च संगान् समतिक्रम्य, सुदुस्तराश्चैव भवन्ति शेषा:।

यथा महासागरमुत्तीर्य, नदी भवेदपि गंगासमाना।।

—समणसुत्त : ११४

जो मनुष्य इन स्त्री—विषयक आसक्तियों का पार पा जाता है, उसके लिए शेष सारी आसक्तियाँ वैसे ही सुतर (सुख से पार पाने योग्य) हो जाती हैं, जैसे महासागर का पार पाने के लिए गंगा जैसी बड़ी नदी।

विषयलोभिल्ला, पुरिसा कसायवसगा।

करेन्ति एक्केक्कमविरोहं।।

—पउमचरियं : ४/४९

विषयों में लोभी और कषायों के वशीभूत पुरुष बिना वैर—विरोध के भी एक—दूसरे का अनिष्ट करते हैं।