ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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अनुस्मृति

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Rethinking of sensual pleasures. भोगोपभोग शिक्षावृत का दूसरा अतिचार:इन्द्रिय विषयों के सुखों को बार बार याद करना ।