ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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अपनाएंंगे ये टिप्स्स तो पैर रहेंंगे मुलायम

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अपनाएंगे ये टिप्स तो बारिश में पैर रहेंगे मुलायम

बारिश में पैरों की खाल उतरने और फंगल इन्फेक्शन की समस्या आम है, इससे बचने का आसान तरीका है, पेडीक्योर कराएं मानसून का अलग मजा है, लेकिन बारीश में आपको कुछ खास ध्यान रखना रखना होता है, अपने शरीर का इस मौसम में पैरों की नरमी बनी रहे, इसके लिए इन आसान से तरीकों को अपनाएं। बारिश में पैरों की सुन्दरता बचाए रखना एक चैलेंज है, लेकिन नियमित कल्ीिंजग, टोिंनग और देखभाल से इन्हें ठीक रखा जा सकता है, ज्यादातर लोगों को इस मौसम में पैरों की खाल उतरने और पंâगल इन्फेक्शन की समस्या होती है, इससे बचने के लिए सबसे आसान तरीका है पैरों का पेडीक्योर कराएं, हफ्ते में दो बार डीप क्लींिंजग और हर रोज क्लींिंजग तो नियमित रूप से करना ही चाहिए, साथ ही मेरी सलाह है कि पिपरमेंट का तेल या हिमालयन सॉल्ट का प्रयोग करना चाहिए। स्पा एक्सपर्ट रेखा चौधरी मानती है, कि बारिश में पंâगल इन्फेक्शन आम है, क्योंकि पैर काफी समय तक भीगे रहते हैं और अगर पुâटवियर खुले न हों, तो पैरों में खुजली और लाल चकते जैसी समस्याएँ हो जाती हैं, इनसे बचने के लिए पेडीक्योर के साथ कुछ और ट्रीटमेंट भी हैं, डेड स्किन हटाने और मसल्स को आराम पहुँचाने के लिए हॉट स्टोन करवा सकते हैं, पेराफिन ट्रीटमेंट भी खूब लोकप्रिय है, इस ट्रीटमेंट से सारे बैक्टीरिया नष्ट हो जाते हैं और पैरों की रंगत निखर उठती है, टीवी होस्ट और मॉडल परीजाद कोलाह मार्शल का कहना है कि बरसात में पैरों की सही देखभाल के लिए पुâट मसाज से अधिक अच्छा कुछ और नहीं है, बरसात में प्रेâश िंमट और अरोमा तेल से पुâट मसाज करवाना बेहद सुवूâन देने वाला होता है, बरसात में जमकर घूमें, एंजॉय करें, लेकिन पैरों का ख्याल रखना न भूलें, ताकि आपके पैरों की गुदगुदाहट, नरमियत, चमक और सौंदर्य बारिश के रेशमी अहसास से और भी खिल जाए।

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बवासीर से उपचार के आयुर्वेदिक तरीके

बवासीर बेहद तकलीफदेह रोग है, हरेक उपचार विधि में इसका निवारण मौजूद है, लेकिन यहाँ प्रस्तुत हैं ऐसी विधि से इसके उपचार के कुछ कारगर तरीके हरड़ अथवा छोटी हरड़ के २ से ५ ग्राम पूर्ण का नित्य सेवन करने तथा अरंडी का तेल लगाते रहने से लाभ होता है। बड़ी इंद्रफला की जड़ को सुखाकर या कनेर की जड़ को पानी में घिसकर बवासीर पर लगाने से लाभ होता है। बड़ी इंद्रफला की जड़ को सुखाकर या कनेर की जड़ को पानी में घिसकर बवासीर पर लगाने से लाभ होता है। नीम का तेल मस्सों पर लगाने से और चार पाँच बूंदे रोज पीने से लाभ होता है। सूरन (जिमिवंâद) को उबाल और सुखाकर चूर्ण बना लें, यह चूर्ण ३२ तोला, चित्रक १६ तोला, सोंठ ४ तोला, काली मिर्च २ तोला, गुड़ १०८ तोला को मिलाकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें, इसे सूरनवटक कहते हैं, ऐसी तीन-तीन गोलियां सुबह-शाम खाने से लाभ होता है। दो लीटर छाछ में ५० ग्राम पिसा जीरा, थोड़ा नमक मिला लें, जब प्यास लगे तक पानी की जगह पर छाछ पी लें, चार दिन में मस्से ठीक हो जाएंगे। छाछ में सोंठ का चूर्ण, सेंधा नमक, पिसा हुआ जीरा व जरा सी हींग डालकर सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है।

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खूनी बवासीर

जीरे का लेप करने से और २ से ५ ग्राम उतने ही घी शक्कर के साथ खाने से या गर्म आहार का सेवन बंद करने से खूनी बवासीर में लाभ होता है। बड़ के दूध के सेवन से रक्तप्रदर व खूनी बवासीर का रक्तस्राव बंद होता है। अनार के छिलके का चूर्ण नागकेशर के साथ मिलाकर देने से रक्तस्राव बंद होता है। (ये प्रयोग करने से पूर्व डॉक्टर की राय लें)

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नींद से समसौता कतई न करें

टीवी, सेलफोन और लैपटॉप की कीमत लोगों को नींद खोकर चुकानी पड़ रही है, हर इंसान की जरूरत बनते जा रहे इन गैजेट से पीछो छुड़ाना मुश्किल है, बेहतर होगा कि आप आसन से उपाय अपनाकर अपनी नींद पूरी करें। सोने का सही समय हो : सोने और जागने का निश्चित समय होना चाहिए, कोशिश करें सप्ताहांत में दिनचर्या न गड़बड़ाए, अगर रात में आपकी नींद पूरी नहीं होती है तो देर तक सोने की बजाय दोपहर में झपकी मार लें। शयनकक्ष का वातावरण अच्छा हो : आपका बिस्तर आरामदायक होने के साथ एकदम फ्लैट होना चाहिए, सोते वक्त हल्का और पतला तकिया लगाएं, शयनकक्ष में बहुत ज्यादा गैजेट और लाइटें नहीं होने चाहिए, इससे नींद में खलल पड़ता है। सोने और खाने के बीच पर्याप्त अंतर हो : दोपहार और रात के खाने के कम से कम डेढ़ घंटे तक न सोएं, इससे पाचन क्रिया गड़बड़ाने के अलावा नींद पर भी असर पड़ता है। रात को मोबाइल को रखें दूर : अपने तकिए के नीचे मोबाइल रखकर कतई न सोएं इससे निकलने वाली खतरनाक किरणे आपकी सेहत को नुकसान पहुँचाने के अलावा नींद को भी खराब कर सकती है, रात में मोबाइल को ऑफ या साइलेंट करके ही सोएं।

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डीहाइड्रेशन से बचना है तो इन्हें खाएं, पीएं

डीहाइड्रेशन में शरीर से पानी के साथ खनिज लवणों की कमी हो जाती है, इससे बचना आसान है, आप नीचे दिए गए फलों को खाकर इससे बच सकती हैं..... कच्चा आम कच्चे आम के पत्ते में विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है, विटामिन सी शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ता है, इसका पना पीने से आराम मिलेगा। अनार यह एंटीऑक्सीडेंट का बेहतरीन स्रोत है, इसमें पॉलीफिनोल प्रचुर मात्रा में होता है, इन तत्त्वों के अद्भुत मेल से अनार प्राकृतिकम सनस्क्रीन का काम करता है, सुबह के नाश्ते में अनार के दाने लें। खीरा : ताजगी और ठंडक खीरा और खाने से मिलती है, इसमें सिलिका नामक तत्त्व प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो ऊतकों को तोड़ने का काम करता है इसमें वैâलोरी बिल्कुल नहीं पाई जाती, यह विटामिन ए, सी और फोलिक एसिड का प्रमुख स्रोत है, शरीर की आंतरिक गर्मी को दूरकर जलन दूर करने में भी खीरा सहायक है। तरबूज इसमें शरीर के लिए आवश्यक कुछ महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट पाएं जाते हैं, जैसे विटामिन ए और सी इस फल में नगण्य मात्रा में वैâलोरी पाई जाती है, तरबूज शरीर के रोग प्रतिरोधक तंत्र को मजबूत करता है। नारियल पानी नारियल पानी एक अद्वितीय पेय है, कारण, मानव रक्त में इलेक्ट्रोलाइट का जो स्तर पाया जाता है, लगभग वही स्तर नारियल पानी में भी पाया जाता है, यह शरीर में पानी की कमी न होने देने का एक सशक्त माध्यम है।

आज का आनंद २४ जुलाई २०१६