ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा देश के समस्त जैन विद्वानों के लिए विशेष सैद्धांतिक विषयों पर ऋषभगिरि-मांगीतुंगी से विद्वत प्रशिक्षण शिविर का पारस चैनल पर ४ दिसंबर, रविवार से ११ दिसंबर २०१६, रविवार तक प्रातः ६ बजे से ७ बजे तक सीधा प्रसारण होगा | घर बैठे देखकर अवश्य ज्ञान लाभ लें |

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अपनी कमियों को देखने का भी प्रयास करिए

लगातार मेहनत करने के बाद आपका मैनेजमेंट आपके हाथों में नेतृत्व संबंधी जिम्मेदारी देने को तैयार नहीं है, तो इसका माफ मतलब है कि आप खुद कितने पानी में हैं, इस बात पर गौर करना चाहिए | कहीं न कहीं आपके काम या व्यवहार मैं खामी है | कुछ ऐसे मैनेजरों से बात की गई, जिन्होंने बहुत निचले स्तर से काम शुरू किया और आज बडी टीम के नेतृत्व का जिम्मा संभाले हुए है | इनसे बातचीत में जाना गया कि कौन-सी कमियां हैं, जो आपके लीडरशिप बनने की राह में अड़चन हैं |

आप अपने काम को पूरी मेहनत से  अंजाम देते है, लेकिन जरूरत पड़ने पर जब मैनेजमेंट कोई टास्क देता है, तो उसे पूरा करने में बेरूखी दिखाते है | साथ ही, यह जताते हैं कि अब से पहले बहुत काम कर चुके हैं |

आप हमेशा 'आई' सिंड्रोम से ग्रस्त  हैं यानी अपनी टीम की उपलब्धियों  का क्या श्रेय खुद लेते हैं | आपको लगता है कि सब आपने ही सारा काम किया और यही आप अपने वरिष्ठों के सामने भी, दिखाने  की कोशिश करते हैं |

आप में हमेशा काॅम्पिटिटर पैदा होने का भय बना रहता है आप अपने जूनियर्स को मजबूत करने और आगे बढ़ने से रोकने में लगे हैं आपको लगता है कि शायद उनमें से कल कोई आपकी चुनौती देने लगेगा | ये रवैया आपकी टीम को कमजोर बनाता है, जिससे टीम की कार्यक्षमता पर बुरा असर पडता है..

आप अपने सहयोगियों पर भरोसा नहीं करते हैं उनके काम को शक की नज़र से देखते हैं ऐसा कर उन सबका भरोसा और अपने प्रति सम्मान खो बैठते हैं |

चाटुकारों की तारीफ़ और काम करने वालों की उपेक्षा कर आप खुद कार्य स्थल में नकारात्मक माहौल पैदा करते हैं, इससे काम प्रभावित होता है | आप में निगेटिव एनवायरमेंट के बुरे असर को समझने की क्षमता नहीं हैं |

आप ज्ञान और विशेषज्ञता पर ज्यादा जोर न देकर अपना नाम आगे रखने में लगे हैं |

आप अथॉरिटी आॅफ लीडरशिप पर जोर देते हैँ और इसके लिए पॉजिटिव एप्रोच के बजाय भय पैदा करने में लगे रहते हैं |