ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

Whatsappicon.png
Whatsappicon.png
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें |


पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा देश के समस्त जैन विद्वानों के लिए विशेष सैद्धांतिक विषयों पर ऋषभगिरि-मांगीतुंगी से विद्वत प्रशिक्षण शिविर का पारस चैनल पर ४ दिसंबर २०१६- रविवार से सीधा प्रसारण चल रहा है | घर बैठे देखकर अवश्य ज्ञान लाभ लें |

अपने बच्चों को बचायें सीसे के जहर से

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


[सम्पादन]
अपने बच्चों को बचायें सीसे के जहर से

एक खोज के अनुसार बताया गया है कि तकरीबन ४० प्रतिशत शहरों में रहने वाले २२ साल से कम उम्र के बच्चों में सीसा अधिक मात्रा में पाया गया है। सीसे का खून में अधिक मात्रा में होना सेहत के लिए बहुत हानिकारक है। तकरीबन १७ प्रतिशत बच्चों में खून में सीसे की मात्रा जितनी होनी चाहिये थी, उससे दुगुनी है। इस हालत का एक बहुत बड़ा कारण गाड़ियों का वातावरण में सीसा छोड़ना है इसलिए शहर में रहने वाले बच्चों के खून में अधिक सीसा पाया जाता है। अब यह बहुत जरूरी हो गया है कि हम हर शहर में सीसा—रहित पैट्रोल आवश्यक कर दें। हैरानी की बात यह है कि न सिर्फ वातावरण में बल्कि कई खाने के पदार्थों में भी सीसा पाया जाता है । एक खोज के अनुसार पिछले साल बताया गया था कि एक मशहूर चाकलेट में सीसा अधिक मात्रा में था और आरेंज वाली आइसक्रीम में भी सीसा पाया गया था ।अब यह दोनों ही बच्चों को बहुत पसंद है तो यकीनन इसका असर बच्चों पर तो होगा। खून में सीसे की अधिक मात्रा की खोज तकरीबन २०,००० शहर में रहने वाले लोगों पर की गयी। दिल्ली, मुम्बई, बंगलौर और हैदराबाद में की गई इस खोज के अनुसार, लगभग ९,००० बच्चों में लगभग २,००० बच्चे, जो १२ साल से कम उम्र के थे, सीसा जहर का शिकार थे।

सीसा जहर सिर्फ कार या ट्रक की वजह से नहीं फैलता। यह कई चीजों में पाया जाता है,जैसे पोलीथन बैग में इस्तेमाल होने वाले रंगों में, पेंट में आदि । आजकल जो नये—नये रंगबिरंगे कप बच्चों के लिए मिलते हैं, उनमें व कई सौन्दर्य प्रसाधनों में भी सीसा पाया गया है। इस प्रकार कई तरीकों से सीसा आपके शरीर में प्रवेश करता है। जिन बच्चों में बहुत अधिक सीसा है वे बच्चे बहुत बेचैन रहते हैं, ज्यादा उधम मचाते हैं और चिड़चिडे भी होते हैं। कभी—कभी इन बच्चों का दिमागी संतुलन भी बिखर सा जाता है। एक और खोज के अनुसार पाया गया कि बड़ी उम्र के लोगों में सीसा जहर होने से मानसिक बीमारी भी हो जाती है। यह सब जान कर हमें ध्यान रखना है कि हम खुद इससे बचने का उपाय ढूंढे। स्वयं ही हम ध्यान रखें तो हम बचाव कर सकते है। कभी भी बच्चों को सस्ते रंगविरंगे टिफिन या कप नहीं देने चाहिए। प्लास्टिक बेग सिर्फ वह इस्तेमाल करें जो खाने के पदार्थों को हानि न करें। हमें सौन्दर्य प्रसाधन भी ध्यान से इस्तेमाल करने चाहिये। कई पाउडरों में सीसे की मात्रा अधिक होती है। फल या सब्जी काटने से पहले बहुत अच्छी तरह धो लेना चाहिए। बच्चे जब भी बाहर से आयें तो तुरन्त हाथ और मुंह ठीक से धोकर ही खाना खाना चाहिए। यह सब जानकर हमें खुद और बच्चों को भी जान लेना चाहिये कि कैसे और किन चीजों में बचाव रखना चाहिए । सीसा जहर से बचना काफी हद तक हमारे अपने हाथ में है।