ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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अपने बारे में भी आप अवश्य सोचेंं

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अपने बारे में भी आप अवश्य सोचें

 आप बच्चों को नियम से दूध और बादाम खाने से दिमाग तेज होता है और दूध पीने से सेहत अच्छी होती है पर आप खुद कभी दूध और बादाम नहीं लेती ना रोकटोक, ना कोई और कारण, फिर ऐसा क्यों? अक्सर देखा गया है कि महिलाएंं जितनी अपने घर के सदस्यों की सेहत और खाने के मामले में उनकी पसंद नापसंद के प्रति सजग होती हैं, उतनी ही अपनी सेहत और खाने के मामले में अपनी पसंद-नापसंद के प्रति लापरवाह. इस बारे में 32 वर्षीय विवाहिता निधी बताती है कि मुझें चॉकलेट बहुत पसंद है जब भी बच्चे चॉकलेट खाते हैं तो मैं कभी-कभी उनसे एक बाइट लेकर खा लेती हूं पर मैंने शायद ही कभी अपने लिए अलग से चॉकलेट खरीद कर खायी हो कारण पूछने पर वह कहती हैं कि ऐसा भी नहीं है कि मुझे चॉकलेट खरीदने की मनाही है पर मैंने कभी इस बारे में सोचा ही नहीं कि मुझे अपने बारे में भी सोचना चाहिए. वहीं 35 वर्षीया गुंजन बताती हैं कि कभी अगर खाने में कोई डिश बच्चों या पति को पसंद आ जाती है तो यह अपने हिस्से की डिश भी उन्हें दे देती हैं.वे कहती है कि ऐसा कर उन्हें अच्छा लगता है. जबकि 40 वर्षीया नूतन का कहना है कि बच्चों को समय पर और पौष्टिक खाने की हमसे ज्यादा जरूरत है, क्योंकि यह उनके शरीर के विकास के लिए बहुत जरूरी है. हमारा क्या है, हमारी तो आधी जिंंदगी बीत चुकी है. परिवार के प्रति समर्पण होना अच्छी बात है पर आप अपने बारे में भी सोचिए.