ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

Whatsappicon.jpg
Whatsappicon.jpg
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्ज एप पर मेसेज करें|

अपमान :

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


अपमान :

खंडिज्जंतो वि ससी अवमाणं सहइ पुण्णिमा जाव।

सूरो पयावहरणे अत्थमइ न खंडणं सहइ।।

—गाहारयण कोष : ७४

खंडित होता हुआ चन्द्र र्पूिणमा तक अपमान को सहन करता रहता है। इससे विपरीत सूर्य अपने प्रताप के चले जाने पर अस्त होना (मरण) ही पसन्द करता है, किन्तु अपमान को नहीं सहता।