ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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अमृत वचन

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अमृत वचन

ये तीन वस्तुएं हमेश प्राप्त करें

ज्ञान, गुण, लक्ष्य
तीन शत्रु से दूर रहें जो जीवन को नर्क बनाते हैं
अहंकार क्ररता एवं कृतघ्नता
ये तीन चीजें जीवन में लाने की चेष्टा करें
मितव्यता, परिश्रम, तत्परता
तीन वस्तुओं का खुलकर प्रयोग करें
प्रशंसा, दान और दुखी को सांत्वना
तीन आचरण कभी न त्यागें इन्हें जीवन में ढालों
विनम्रता, साहस और प्रेम
तीन वस्तुएं कभी नहीं लौटती
तीर कमान से, शब्द जुबान से, अवसर हाथ से,
तीन वस्तुओं को जीवन में हमेशा याद रखना चाहिए।
सच्चाई, कर्तव्य और मृत्यु
जीवन में सब चीज दुबारा प्राप्त हो जाएगी
माता पिता एक बार ही मिलते हैं जीवन में
जीवन में धन की चोरी हो सकती है लेकिन
विद्या, चरित्र, योग्यता की चोरी कभी नहीं हो सकती।

हस्तिनापुर टाईम्स
१८ अगस्त , २०१४