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अयोध्या तीर्थ हमारा, कहा शाश्वत है प्यारा

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अयोध्या तीर्थ हमारा, कहा शाश्वत है प्यारा

तर्ज—अरे रे......
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अयोध्या तीर्थ हमारा, कहा शाश्वत है प्यारा तीर्थंकरों की जन्मभूमि है।
जहाँ नये मंदिर का हुआ है निर्माण, मंदिर में विराजे ऋषभदेव भगवान।
यही ऋषभदेव का है जनमस्थान, जिसे नमन करने से बनते हैं काम।।
अयोध्या.।।टेक.।।
बड़ी चमत्कारिक ऋषभदेव टोंक है, जहाँ चरणों में सभी देते धोक हैं।
यहाँ कभी जलता घी का दीप दिखा था, तभी जैन शासन का सौभाग्य जगा था।।
अयोध्या.।।१।।
एक बार गणिनी ज्ञानमती माताजी।
ऋषभदेव प्रभु जी के पास पधारीं।।
तभी तीर्थ का विकास शुरू हो गया।
ऋषभ जन्मभूमि का उद्धार हो गया।।अयोध्या.।।२।।
प्रतिमा के निर्माण जैसा पुण्य न दूजा।
मंदिर के निर्माण का है पुण्य अनूठा।।
करने व कराने वाले सुखी हों सदा।
‘‘चन्दनामती’’ वे हों जयशील सर्वदा।।अयोध्या.।।३।।
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