ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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अरति परीषह जय

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अरति परीषह जय
Getting victory over affliction from hatred, passion etc. रागद्वेष के कारणों के उपस्थित होने पर भी किसी से रागद्वेष नहीं करना ।