ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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इस मंत्र की जाप्य दो दिन 18 और 19 तारीख को करे |

सोलहकारण व्रत की जाप्य - "ऊँ ह्रीं अर्हं शक्तितस्त्याग भावनायै नमः"

अरहनाथ

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श्री अरहनाथ भगवान

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जन्मभूमि - हस्तिनापुर (जिला मेरठ) उत्तर प्रदेश

पिता - महाराजा सुदर्शन

माता - महारानी मित्रसेना

वर्ण - क्षत्रिय

वंश - कुरुवंश

देहवर्ण - तप्त स्वर्ण सदृश

चिन्ह - मछली

आयु - चौरासी हजार वर्ष

अवगाहना - एक सौ बीस हाथ

गर्भ - फाल्गुन कृ.३

जन्म - मगसिर शु.१४

तप - मगसिर शु. १०

दीक्षा-केवलज्ञान वन एवं वृक्ष - सहेतुक वन एवं आम्र वृक्ष

प्रथम आहार - चक्रपुर के राजा अपराजित द्वारा (खीर)

केवलज्ञान - कार्तिक शु. १२

मोक्ष - चैत्र कृ. अमावस्या

मोक्षस्थल - सम्मेद शिखर पर्वत

समवसरण में गणधर - श्री कुभार्य आदि ३०

समवसरण में मुनि - पचास हजार

समवसरण में गणिनी - आर्यिका यक्षिला

समवसरण में आर्यिका - साठ हजार

समवसरण में श्रावक - एक लाख साठ हजार

समवसरण में श्राविका - तीन लाख

जिनशासन यक्ष - महेन्द्र देव

जिनशासन यक्षी - विजया देवी

भगवान अरनाथ वर्तमान वीर नि.सं. २५३४ से १० अरब ६५,८६,५३४ वर्ष पहले मोक्ष गए हैं।