ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

Whatsappicon.png
Whatsappicon.png
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें |


पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा देश के समस्त जैन विद्वानों के लिए विशेष सैद्धांतिक विषयों पर ऋषभगिरि-मांगीतुंगी से विद्वत प्रशिक्षण शिविर का पारस चैनल पर ४ दिसंबर, रविवार से ११ दिसंबर २०१६, रविवार तक प्रातः ६ बजे से ७ बजे तक सीधा प्रसारण होगा | घर बैठे देखकर अवश्य ज्ञान लाभ लें |

अरे, जग जा रे चेतन! नींद से

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

[सम्पादन]
अरे, जग जा रे

तर्ज—अरे! हट जा......

अरे, जग जा रे चेतन! नींद से,

तुझे सतगुरु आये जगावन को।।टेक.।।
काल अनादी से इस जग में-२
भ्रमण करे तू चारों गति में-२।
अरे, मोह नींद को दूर भगा,
तुझे सतगुरु आये जगावन को।।१।।
मानुष तन दुर्लभ है जग में-२,
सदुपयोग इसका तू कर ले-२।
अरे, विषय कषाय को त्याग दे,
तुझे सतगुरु आये जगावन को।।२।।
पर का कुछ उपकार भी कर ले-२,
सज्जन का सत्कार भी कर ले-२।
अरे, कर ले आतम ध्यान भी,
तुझे सतगुरु आये जगावन को।।३।।
सात व्यसन का त्याग तू कर दे-२,
पाँच पाप भी मन से तज दे-२।
अरे, धर्म में कर अनुराग रे,
तुझे सतगुरु आये जगावन को।।४।।
कहे ‘‘चन्दनामती’’ सभी से-२,
कर लो मैत्री भाव सभी से-२।
अरे, भज ले प्रभु का नाम रे,
तुझे सतगुरु आये जगावन को।।५।।

श्श् ६ NN