ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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प्रथामाचार्य श्री शांतिसागर महाराज की 62 वीं पुण्यतिथि (श्रावण शुक्ला दुतिया) 23 अगस्त को मुंबई के जैनम हाल में पूज्य गणिनी ज्ञानमती माता जी के सानिध्य में मनायी जाएगी जैन धर्मावलंबी अपने-अपने नगरों में विशेष रूप से इस पुण्यतिथि को मनाकर सातिशय पुण्य का बंध करें|
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इस मंत्र की जाप्य दो दिन 22 और 23 तारीख को करे |

सोलहकारण व्रत की जाप्य - "ऊँ ह्रीं अर्हं साधुसमाधि भावनायै नमः"

अर्थराइटिस को ऐसे करें नियंत्रित

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अर्थराइटिस को ऐसे करें नियंत्रित

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अर्थराइटिस की समस्या से पीडि़त व्यक्तियों के लिये जाड़े का मौसम परेशान कर सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि इन दिनों घुटने और अन्य जोड़ों में दर्द के मामले बढ़ जाते हैं।

कारण

सर्दियों में घुटनों के दर्द में वृद्धि होने के कई कारण हैं। जब तापमान घटता है, तो अर्थराइटिस बढ़ जाती है। इसका कारण यह है कि सर्दियों का मौसम सामान्य दिनों की तुलना में जोड़ों को अधिक कठोर बना देता है। इसके कारण घुटने में तेज दर्द होता है। तापमान में व्यापक परिवर्तन के कारण सूजन वाले जोड़ों के आसपास और अधिक सूजन पैदा हो जाती है। इससे आसपास की नसों (नव्र्स) में अधिक रगड़ पैदा होती है। इस कारण घुटने में दर्द और कड़ेपन का अहसास होता है।

सर्दियों में अर्थराइटिस के और बढ़ने का एक कारण और भी है। वह यह कि इन दिनों मरीज जाड़े के कारण सुबह उठकर टहलना, व्यायाम करना और अन्य शारीरिक गतिविधियां बंद कर देते हैं या फिर कम कर देते हैं। इस प्रकार उनके घुटने समेत अन्य जोड़ों का मूवमेंट कम होता है। यह स्थिति जोड़ों के लिए समस्या पैदा कर सकती है।

रोकथाम

१.-अर्थराइटिस से पीडि़त व्यक्ति ऐसी मुद्राओं(पोस्चर्स)में न रहें, जिनसे जोड़ों पर जोर पड़ता है। जैसे घुटनों की अर्थराइटिस में व्यक्ति को जमीन या फर्श पर उकड़ू नहीं बैठना चाहिए।

२.-अर्थराइटिस से पीडि़त व्यक्ति प्रभावित जोड़ों को ठंड से बचाएं। पर्याप्त ऊनी वस्त्र पहनें।

३.-जोड़ों के व्यायाम में कमी न आने दें।

४.-एक झटके में अपनी क्षमता से ज्यादा वजन न उठाएं।

५.-डॉक्टर द्वारा सुझायी गयी दवाओं का नियमित रूप से सेवन करें।

६.-डॉक्टर की सलाह के बगैर पेनकिलर्स का प्रयोग न करें।

चिकित्सा

अर्थराइटिस की चिकित्सा में समय के साथ उपचार का तरीका बदल सकता है यह इस बात पर निर्भर करता है कि किस तरह की अर्थराइटिस है। अगर सर्जरी के बगैर इलाज से जोड़ों की समस्या दूर नहीं होती, तब मरीज को सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। वैसे शरीर के दो प्रमुख जोड़ों(घुटने और कूल्हे) की अर्थराइटिस का अंतिम कारगर उपाय घुटना प्रत्यारोपण और कूल्हा प्रत्यारोपण है।

डॉ.शरद कुमार अग्रवाल
वरिष्ठ अस्थि व जोड़ रोग विशेषज्ञ
मैक्स हॉस्पिटल, दिल्ली
04 Nov 2014, दैनिक जागरण