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पू० गणिनी श्रीज्ञानमती माताजी ससंघ मांगीतुंगी के (ऋषभदेव पुरम्) में विराजमान हैं |

अर्द्धेन्द्रा

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अर्द्धेन्द्रा
The 4th dwelling place of hellish beings (of 5th hell). पांचवें नरक का चौथा इन्द्रक बिल ।