वीर निर्वाण संवत 2544 सभी के लिए मंगलमयी हो - इन्साइक्लोपीडिया टीम

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22 अक्टूबर को मुंबई महानगर पोदनपुर से पू॰ गणिनी ज्ञानमती माताजी का मंगल विहार मांगीतुंगी की ओर हो रहा है|

अलोक :

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अलोक :

जीवाश्चैव अजीवाश्च, एष लोको व्याख्यात:।

अजीवदेश आकाश: अलोक: स व्याख्यात:।।

—समणसुत्त : ६३६

यह लोक जीव और अजीवमय कहा गया है। जहाँ अजीव का एक देश (भाग) केवल आकाश पाया जाता है, उसे अलोक कहते हैं।

अवियारिऊण कज्जं सहसच्चिय चे नरा पयट्टन्ति।

डज्झंति तेवराधा, दीवसिहाय पयंगो व्व।।

—गाहारयण : २५३

अविचारपूर्वक आवेश में सहसा जो काम करते हैं, वे दीपशिखा में पतंगे की तरह जल जाते हैं।