ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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अवष्टम्भ

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अवष्टम्भ
Power of particular karma producing sense of vision.

बल-चक्षुदर्शन की शक्ति चक्षुदर्शनावरण, वीर्यान्तराय के क्षयोपशम से तथा अंगोंपांग नामकर्म के बल से अत्पन्न होती है ।