ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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परम पू. ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में सिद्धचक्र महामंडल विधान (आश्विन शुक्ला एकम से आश्विन शुक्ला नवमी तक) प्रारंभ हो गया है|

अव्याबाघ

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अव्याबाघ
A type of special heavenly deities (Laukantik), Undisturbed mental peace.

लौकान्तिक देवों का एक भेद,प्रतिजीवी गुण-वेदनीय कर्म के माश से आकुलता का अभाव होना। सिद्धों में यह गुण प्रगट होता है ।