Whatsappicon.jpg
Whatsappicon.jpg
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें|


२७ अप्रैल से २९ अप्रैल तक ऋषभदेवपुरम् मांगीतुंगी सिद्धक्षेत्र में लघु पंचकल्याणक प्रतिष्ठा आयोजित की गई है |

२५ अप्रैल प्रातः ६:४० से प्रतिदिन पारस चैनल पर पूज्य श्री ज्ञानमती माताजी के द्वारा षट्खण्डागम ग्रंथ का सार प्रसारित होगा |

अष्टसहस्री (तृतीय भाग)

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अष्टसहस्री (तृतीय भाग) कवर पेज

अष्टसहस्री (तृतीय भाग) के विषय में
प्रकाशक दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान, जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर
लेखक गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी
पुस्तक के विषय में इसमें कारिका २४ से ११४ की टीका हुई है। तीनों भागों में पूज्य माताजी ने जगह-जगह विशेषार्थ व भावार्थ तो दिये ही हैं, सारांंशों के दे देने से परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को अतीव सुगमता हो गई है।

तीन भागों में प्रकाशित इस अष्टसहस्री की हिन्दी टीका का नाम स्याद्वाद चिन्तामणि टीका है। वीर ज्ञानोदय ग्रंथमाला के प्रथम पुष्प के रूप में प्रकाशित इस गं्रथ के हिन्दी अनुवाद सहित प्रथम भाग के विमोचन में राजधानी दिल्ली के अन्दर आचार्य श्री धर्मसागर महाराज, आचार्य श्री देशभूषण महाराज, उपाध्याय श्री विद्यानंद महाराज एवं चारों सम्प्रदाय के अनेक वरिष्ठ साधु-साध्वियों का सानिध्य रहा। अष्टसहस्री ग्रंथ के इस हिन्दी अनुवाद से सम्पूर्ण विद्वज्जगत में ज्ञानमती माताजी की विद्वत्ता का प्रचार-प्रसार हुआ तथा आचार्यश्री देशभूषण जी महाराज ने इस महान कृति को देखकर पूज्य माताजी को दिल्ली में ‘‘न्याय प्रभाकर’’ की उपाधि से अलंकृत किया था।

पुस्तक पढने के लिए यहाँ क्लिक करें