ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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अहंं खत्म करने से लौटेंगी खुशियाँँ

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अहं खत्म करने से लौटेंगी खुशियाँ

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रिलेशनशिप- ये देखकर बुरा लगता है कि कुछ सफल लोग कई काम सिर्फ "सेटर आँफ अट्रेकशन' यानी आकर्षण का केंद्र बनने के लिए करते हैं. इसके लिए वे अपने अहम को अहमियत देने से भी नहीं चूकते है.अहंं मोटिवेशन का सोर्स हो सकता है मगर, ये मोटिवेशन का गलत तरीका है इसे समय-समय पर फीडिंग की जरूरत पड़ती है. समस्या ये है कि अहंं को फीड करने पर सुपीरियरिटी कांप्नप्लेक्स पैदा होता है. यहीं, ऐसा न करने से इंफीस्थिरिटी काँक्लेक्स आता है अह किसी भी तरह का हो, लेकिन यह दिमाग का सुकून और मन की शति लीन लेता है. इसे मोटिवेटर बनाने के लिए आपको अपने सुख-चैन को दाव पर लगाना पड़ता है. सवाल ये है कि बया आप भी खरीदने के लिए बाली के बेचना चाहेंगे? हम अहं को खत्म करके रिलेशनशिप बनाने की बजाय रिलेशनशिप खत्म करके अहम को फीड करना शुरू कर देते हैं. अह की वजह से रिश्ते टूट जाते हैं. महत्वपूर्ण मौके हाथ से निकल जाते है इतना कुछ होने के बाद भी हम अह को खुद से बाहर निकालने का प्रयास नहीं करते है अह से भरे इंसान की स्थिति हर समय आग पर चलने जैसी होती है. ऐसे में हर पल मुश्किल और हर समस्या गभीर लगती है. अहंम और आराम के बीच कोई रिश्ता नहीं है. अहम में आप हर वक्त समस्याओं को अहं खत्म करने से लौटेंगी खुशियां जीतने की कोशिश काते हैँ. आप ट्सरों से बेहतर परफॉर्म काने में जुट जाते हैं. अह को छोड़कर आप खुद से जीतने का प्रयास करते है और अपनी क्षमताओं से मैक्सिमम आउटपुट देने में लग जाते हैं इसमें आप खुद ५ से लड़ने लगते है आप खुद के भीतर चल रही कश्मकश के खिलाफ लड़ते हैं. एक कौआ जिसकी चोंच में मास का टुवम्हा है उसके पीछे कई पली लग जाते है च्चोंव्र से टुकडा गिरते ही सभी पली दुक्से के पीछे लग जाते है अकेले उड़ता कौआ महसूस करता है कि टुकडा फेंकते ही उसे आकाश में अकेले उड़ने की आजादी मिल गई है. ऐसा ही आपके साथ है अपने भीतर से मास के टुकडे यानी अह को निकाल है इससे आपकी शति से जीने का मौका मिलेगा अह कौ अपने अदर से निकाल दै. लेकिन केसे? ये आसान है. इसके लिए मन की शति को बाकी चीजों से ज्यादा महता दे.