ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

India 120-animated-flag-gifs.gif 71 वाँ स्वतन्त्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ...

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इस मंत्र की जाप्य दो दिन 16 और 17 तारीख को करे |

सोलहकारण व्रत की जाप्य - "ऊँ ह्रीं अर्हं संवेग भावनायै नमः"

अहिंसा-

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अहिंसा-
अहिंसा का व्यापार बाहर व भीतर दोनों ओर होता है। बाहर में तो किसी भीर छोटे या बडे नीव को अपने मन से या वचन से या काय से किसी प्रकार की भी हीन या अधिक पीडा न पहुँचाना तथा उसका दिल न दुखाना अहिंसा है, और अन्तरंग में रागद्वेष परिणामों से निवृत्त होकर साम्यभाव में स्थित होना अहिंसा है।