ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा देश के समस्त जैन विद्वानों के लिए विशेष सैद्धांतिक विषयों पर ऋषभगिरि-मांगीतुंगी से विद्वत प्रशिक्षण शिविर का पारस चैनल पर ४ दिसंबर, रविवार से ११ दिसंबर २०१६, रविवार तक प्रातः ६ बजे से ७ बजे तक सीधा प्रसारण होगा | घर बैठे देखकर अवश्य ज्ञान लाभ लें |

अहिंसा के देश में हिंसा का तांडव

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भारतीय संस्कृति मेँ 'दो धारायें गं

फ्लू आदिकाल से चखी आ रही हैं है एक है श्रमण परंपरा व दूसरी है  वैदिक परपरा । जिन्हें क्रमश: जैन है

क्या ' च सनातन परंपरा भी कहा जाता रु तूर्य आणा जिदृछैणाक्ल है । कौनसी परम्परा पुरानी है, हृ क्या हैं इसमें जाने की जरूरत नहीं है

क्योंकि वेदों में भगवान ऋषभदेव, अजितनाथ व अरिष्टनेमि को नमन किया पाया है, जिससे यह प्रकट होता है कि रजब भी वेदों की रचना हुई, तब तक यै तीर्थकर इस पृथ्वी पर हो चुके थे 1

वर्तमान काल की चौबीसो में 22बें तीर्थकर श्री नेमिनाथ को ही आँरेष्टनेमि कहा जाता है जो कि नारायण श्री कृष्ण के चचेरे आई थे, जिन्होंने अपने विवाह के समय मूक प्राणियों की

पुकार सुनकर, करूणाबश उन्हें जाडे से भुवत कर दिया व सांसारिक अंधनों का त्याग वर जूनागढ़ से गिरनार चले गये व कठिन तपस्या कर निर्वाण को प्राप्त किया । उन्हीं की परंपरा में हूँ4वें तीर्थकर भगवान महावीर 2633 वर्ष पूर्व हुए तथा यह भगवान महावीर का ही शासन काल कहा जाता है ।

भगवान महाबीर के जीबन काल में धर्म के नाम पर यज्ञों मैं पशुबलि दी जाती थी, जिसके खिलाफ भगवान महावीर ने धर्म प्रचार करते हुए उसे छंद कराया लेकिन हमारे देश में 1 991 तो 92 में विदेशी मुद्रा की खातिर मांस नियति जीति बनाई वै पाई व तबसे आज तक मांस नियति में निरंतर वृद्धि हो रही है 1

जबकि अब हमारे देश का विदेशी मुद्रा भण्डार 367 अरब मैं डालर से अधिक है । र्र

हमारे देश से करीब 1…5 करोड गोवंश व भैंसों का कत्वा 1 करके उनका मास विदेशों की भूख शति करने केलिए निर्यात

किया जा रहा है तथा इसके अतिरिक्त भेड़, बकरी, सूअर, ऊंट ' ध घोड्रे आदि की संख्या अलग है । मैं

मौरुट्री प्रोडक्टूस की तो जात ही अलग है-अण्डे को शाकाहारी बताया जा रहा है व बच्चों को दिए जाने वले मिड है मील में शामिल किये जाने की सिफारिश क्री जा रही है "जबकि अण्डे खाना मांसाहार है क्योंकि यह किसी पेड़ पर नहीं उगता है । अण्डे के स्थान पर यदि बच्चों क्रो मिड है मील में मूंगफली ही जाडे तो उससे अधिक प्रोटीन, क्रैस्थियम आदि

८' ५ ८५1 हां ५ ५ ८2

'८ सां ८३१ माँ 43 आँ ८3 61 क्ष

पौष्टिक पदार्थ बच्चों को मिल सकते हैं । केन्द्र सरकार ने विदेश व्यापार हेतु कारि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद नियति विकास प्राधिकरण का 'गठन किया हुआ है । जिसने दिनांक ०5-09-2०14 को एक आदेश जारी कर ताजा फलों, फूलों, प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के साथ पशुउत्पादों अति अण्डे, मांस आदि के नियति के लिए वित्तीय सहयोग के नाम पर सब्सिडी प्रदान करने की अधिसूचना जारी जैकी है । जिसके अनुसार मांस निर्यातकों को करीब दि; तरीके से विशेष सुविधाएं प्रदान की जाती है जबकि अन्य वस्तुओं के नियति में उपरोक्त प्रकार की विशेष सुविधाएं

उपलब्ध नहीं कराई जाती है । इस समय हमारा देश विश्व में बीफ सप्लाई में प्रथम

स्थान की और अग्रसर हो रहा है । जिससे भारत जैसे

अहिंसक देश में हिंसा बढना स्वाभाविक है । स्थान-स्थान पर

पशुओं को एकांवेत कर निर्ममता पूर्वक ट्रक, ट्रोलों, टैंकरों ' व पिकअप गाडियों में भरकर ले जाया जा रहा है एवं पशु । परिवहन नियम, (1978 यहाँ मोटर वहन अधिनियम के ह प्रावधानों का खुले आम उल्लंघन किया जा रहा है । इसके

अलावा मांस उत्पादन हेतु कितने पशुओं की हत्या की जा रही

रै है, इसकी कोई जानकारी उक्त प्राधिकरण और कृषि एवं ने पशुपालन विभाग के खास नहीं है ।

में एपीडा की वैबसाइट झास्नास्नाम्भण्डनुढहष्णर्द्धनु के अक्तिडों है के अनुसार वर्ष 2033-32 में 9,86३18, 2042-13 में

है 11 (7,506, 2033-44 में (4,49,758 एवं 2०14-15 में व 14,75 जल मैट्रिक उन भैंस मांस का नियति किया पाया है, जिसमें गोमांस शामिल है क्योंकि कानूनी रूप से गोमांस के

कृ नियति पर पतिबधि है, जिससे इसे सफेदा ब्रांड के नाम से बेचा [ जाता है । फिर इम विचार करें कि हमारे देश क्रो मांस निर्यात मैं से यया मिल रहा है क्योकिं मांस नियति कोई शुल्क देय नहीं है, मांस उत्पादकों की उपाय करमुक्त है, विभिन्न प्रकार की सब्सिडी दी जा रही है एवं जो विदेशी मुद्रा मसि निर्यातकों को मिलती है, उसका अधिकांश भाग मांस को खराब बताकर उसका मूल्य हवाला में लेकर विदेशों में ही विनियोग कर दिया जाता है । हमारे देश से मांस नियति के परिणाम स्वरूप शुद्ध दूध का उत्पादन घट रहा है । स्वयं भारत सरकार ने सर्वोच्च

न्यायालय में प्रस्तुत शपथ-मब में यह तथ्य स्वीकार किया है

कि 88 प्रतिशत दूध मिलावटी पाया पाया है । जबकि बच्ची, बुजुर्गों एवं युवक-युवतियों को स्वास्थ्य क्री दृष्टि से दूध भोजन का एक आवश्यक तत्व है, उपलब्ध होना दूभर हो जावेगा । दूध की अमित जो वर्तमान में 45-50 रूपये प्रति लीटर है, वह छाढ़कर पांच वर्ष में ही मैं00 रू. (पति मित्र हो जावेगी ।

इण्डियन डेयरी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एन.आर.भसीन मैं स्पष्ट कहा है कि हमारे देश में दुग्ध उद्योग को विपरीत प्रभावों से बचाने के लिये भैंसे मांस नियति को हतोत्साहित किया जाना चाहिये है इसका परिणाम बहुत बडी संख्यब्जा में दुधारू पशुओं का वध किया जाना है जिसने दुग्ध उद्योग को बुरी प्रभावित किया है । इस प्रवृत्ति यर रोक लगाईं जानी चाहिये एवं मांस नियति पर दो जा रही रियायतों को की करना चाहिये । (1१०12 15111419 3९11१?श्या -3८13333'1३ 2011 1१' 14-12

इसके अतिरिक्त अभी हाल ही में संयुक्त राष्ट्रसंघ ने एक सर्वेक्षण में पाया है कि पशुहत्या से 18 प्रतिशत नंलोबल वार्मिंग होती है, जबकि सेरे वाहन प्रदूषण से भात्र 34 प्रतिशत वार्मिंग पर असर पड़ता है । जिससे श्री आर. के. पचौरी, प्रसिद्ध वैज्ञानिक के अनुसार कम से कम एक सप्ताह में एक रवाना शाकाहारी होना चाहिये ताकि साम रलोबल वार्मिग के दुष्परिणामों से बच लिके ।

संयुक्त राष्ट्र संघ के पर्यावरण कार्यक्रम की रिपोर्ट के अनुसार विश्व का 70 प्रतिशत ताजा यानी पशुओं के रख--, रखाव पर खर्च होता है तथा यदि शाकाहार को अपनाया जावे तो यक वैज्ञानिक के अनुसार ग्रीनहाउस मैसेज में 50 प्रतिशत की कमी आ सकती है । 2030 को संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार शाकाहारी भोजन से विश्व को भूख, गरीबी एवं जलवायु परिबर्तन के दुष्प्रभावों से बचा सकता है । (श्यास्थाश्या ८10शा11३063ऱरं11०ऱदु111)

दिल्ली विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान के प्रो. मदन मोहन बजाज ने अपने शोध में पाया हैकि प्राकृतिक आपदाएं, भूकम्प आदि में जीवहत्या जाका आरी योगदान है । जिस प्रकार वृक्षों एवं पशु पक्षियों को नष्ट किया जा रहा है, उसी के कारण पर्यावरण संतुलन बिगड़ता जा रहा है क्योंकि पशु पक्षी भी प्रकृति का अंश है एवं उनका अस्तित्व भी आवश्यक है । जलवायु परिवर्तन का कारण भी प्राकृतिक संतुलन बिगड़ना है 1 जंगल व जल घटता जा रहा है, जंगल जाट-कष्ट कर भवन व सड़कें आदि बनाई जा रही हैं एवं जुल का अत्यधिक दोहन हो रहा हैर मांस उत्पादन एवं शराब बनाने में जितना अधिक जलस्रोतों का दोहन हो रहा है, उसी से भूजल भार निरंतर नीचे

पर' शा प्न रह्या

गिरता जा रहा है एवं मांस उत्पादन के कारण पशुओं के रजत से भूमण्डल प्रदूषित हो रहा है है पशुओं के आहें "सारे वायुमण्डल को प्रदूषित करती हैं, जिसका सीधा असर ओजोन होयर्स पर पड़ रहा है जो कि हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव खान रही है एवं चौमारियों बढती जा रही हैं 1 हमारे संविधान निर्माताओं ने नीति निर्देशक गांवों में प्रकृति एवं पशु पक्षी सभी के प्रति दयाभाव रखने का निर्देश अनुच्छेद प्राय । जी । में किया है तथा माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय जीव जन्तु कल्याण बोर्ड बनाम ए. नागराज एवं अन्य के ग्रहण में दि. 07--0प्र-20१4 को मील का पत्थर गढने चाला निर्णय प्रदान करते हुए कहा कि पशुओं को भी जीने का अधिकार है तथा उनके जीवन से खिलचाड़ नहीं किया जा सकता है किन्हें हाल ही में हमारे देश के अहिंसा के सिद्धांत,

३ लि१वि१शन के प्रावधान व सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के

रि

विपरीत बिहार सरकार का नीलगायों को मारने को अनुमति केन्दीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को और से दी गई है, उसे बन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 3972 की भावना के अनुरूप नहीं भाना जा सकता है । इतना ही नहीं पश्चिम बंगाल में हाथी, हिमाचल संदेश में अंदर, गोआ में राट्रीय पक्षी भोर व भहाराद्रु के चन्द्रपुर में जंगली सूअरों को मारने क्री अनुमति प्रदान को जा रही है जो कि पूर्णत अवैध व मनमानी कार्यवाही है । इम

र पर रोक लगनी चाहिये ।

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है

चुनावों से पूर्व हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी जा-मआओं में स्वयं कहा था कि मसि-मटन के

रै नियति पर हजारों करोड रू. की सब्सिडी क्यों? एवं विदेशियों ३ के स्वाद के लिये हमारा पशुधन कट-कष्ट कर क्यों भेजा जा

… रहा है? फिर अभी तक मांस नियति क्यों किया जा रहा है?

जैन धर्म सहित सभी धर्मो का मूल सिंद्धांत अहिंसा है । संविधान में सभी धर्मों का एवं उनके अनुयायियों को भावनाओं की कद्र करने की बात वहीं गई है 1 जिससे मांस नियति एवं यूके पशुओं की हत्या से जैन-जैनेत्तर सभी धमविलमिबयों एवं अहिंसा जैनियों की भावनाओं को ठेस पहुंच रही है । जिससे राट्रीय स्तर पर अहिंसा शाकाहार से जुड़े सभी संगठन जैसे जैन ममाज, आर्य समाज, बाबा जय गुरूदेव, मानव उत्थान सेवा समिति, गायत्री परिवार एवं प्रजापिता ब्रह्माकुमारी आदि एक मंच पर बैकर कार्यक्रम बनायें तथा सभी धर्माचार्य, साधु संत मार्गदर्शन प्रदान करें ताकि इस भीषण हिसा का समुचित रूप है प्रखर विशेष किया जा सके व मांस नियति के लिए किये

ना रहे पशुवध पर रोक लग सके ।