ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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अहिच्छत्र तीर्थ के पाश्र्वनाथ का

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अहिच्छत्र तीर्थ के पाश्र्वनाथ का

तर्ज-जहाँ डाल-डाल पर............

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अहिच्छत्र तीर्थ पार्श्वनाथ का अतिशय देखो छाया,
जिनधर्म का ध्वज लहराया।।टेक.।।
प्राचीन जिनालय में पारस प्रभु ध्यानमग्न बैठे हैं।
हाँ ध्यानमग्न............
मानों कमठासुर के संकट को आज भी वे सहते हैं।।
हाँ आज भी............
उनके दर्शन-वंदन से बनती शक्तिमान यह काया,
जिनधर्म का ध्वज लहराया।।१।।
श्री तीस चौबीसी मंदिर से भी तीर्थ का मान बढ़ा है।
हाँ तीर्थ की ...................
उस मंदिर में प्रभु पार्श्वनाथ की खड्गासन प्रतिमा है।।
हाँ खड्गासन................
वहीं पार्श्वनाथ पद्मावती मंदिर का भी अतिशय छाया,
जिनधर्म का ध्वज लहराया।।२।।
जिनके तन-मन का रोम-रोम प्रभुभक्ती में अर्पित है।
प्रभु भक्ती में............
उन गणिनी ज्ञानमती जी की प्रेरणा शक्ति सुरभित है।।
प्रेरणा शक्ति............
‘‘चन्दनामती’’ उनके सानिध्य में उत्सव सबने मनाया,
जिनधर्म का ध्वज लहराया।।३।।

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