ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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परम पू. ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में सिद्धचक्र महामंडल विधान (आश्विन शुक्ला एकम से आश्विन शुक्ला नवमी तक) प्रारंभ हो गया है|

अह्वानन

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अह्वानन
Invocation. आमंत्रण-भावों की एकाग्रता के लिये पूजा के प्रारम्भ में जिनेन्द्र भगवान को हृदय में आमंत्रित करते है, उसी के प्रतीक रूप पुष्प से स्थापना करना।