ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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आई दीक्षा जयंती आज, प्रज्ञाश्रमणी की

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भजन

रचयित्री-आर्यिका सुदृढ़मती (संघस्थ)
तर्ज-तुम करो प्रभु से प्यार........(तुम करो पंचकल्याण)]]


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आई दीक्षा जयंती आज, प्रज्ञाश्रमणी की।
चंदनामती जी मात, प्रज्ञाश्रमणी की।
करो सब मिल जय जयकार, प्रज्ञाश्रमणी की।।
ज्येष्ठ बदी मावस की तिथि की।
मोहिनी ने कन्या जन्मी थी।
माधुरी वही हैं आज, प्रज्ञाश्रमणी जी।।१।। आई............

प्रथम बार गुरु दर्शन पाए।
गोम्मटसार श्लोक सुनाए।।
वही बनीं आर्यिका मात, प्रज्ञाश्रमणी जी।।२।।आई.........

गणिनी माता ज्ञानमती से।
दीक्षा ली आर्यिका बनीं ये।।
चंदनामती हुर्इं ख्यात, प्रज्ञाश्रमणी जी।।३।।आई......

ज्ञानमती जी अभयमती जी।
इन दोनों की ये लघु भगिनी।।
हुर्इं रत्नमती जी मात, इनकी जननी थीं।।४।।आई......

षट्खण्डागम हिन्दी टीका।
गुरु आज्ञा से आपने लिक्खा।।
रचे, पूजन भजन हजार, प्रज्ञाश्रमणी जी।।५।।आई.....

दीक्षा रजत जयंती आई।
सब मिल गाओ, आज बधाई।।

करें ‘‘सुदृढ़मती’’ जयकार, प्रज्ञाश्रमणी की।।६।।आई.........