वीर निर्वाण संवत 2544 सभी के लिए मंगलमयी हो - इन्साइक्लोपीडिया टीम

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22 अक्टूबर को मुंबई महानगर पोदनपुर से पू॰ गणिनी ज्ञानमती माताजी का मंगल विहार मांगीतुंगी की ओर हो रहा है|

आई हैं आई हैं आई हैं, मां ज्ञानमती जी आई हैं

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आई हैं आई हैं आई हैं

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आई हैं आई हैं आई हैं, मां ज्ञानमती जी आई हैं।
लाई हैं लाई हैं लाई हैं, सन्देशा ज्ञान की लाई हैं।। टेक.।।
इक ग्राम में जन्मी बाला ने, अनुपम इतिहास बनाया है।
गणिनी मां ज्ञानमती बनकर, जग में प्रकाश पैलाया है।।
छाई हैं छाई हैं छाई हैं, ये जनमानस में छाई हैं।। आई हैं......।।१।।
जो महाआत्माएं होतीं, युग में परिवर्तन करती हैं।
उनकी तप त्याग कथाएं ही, सबमें नवजीवन भरती हैं।।
पाई हैं पाई हैं पाई हैं, हमने अपनी निधि पाई हैं।। आई हैं......।।२।।
ये प्रान्त अवध का गौरव हैं, ब्राह्मी माता की प्रतिकृति हैं।
शारद माता इनकी प्रतिभा में, देख रही निज अनुकृति हैं।।
गाई है गाई है गाई है, इनकी यशगाथा गाई है।। आई हैं......।।३।।
चैतन्य ज्ञान की ज्योति, ज्ञानमति माता को हम करें नमन।
‘चन्दनामती’ पा सकते हैं, हम भी उस ज्ञान के कुछ रज कण।।
लाई हैं लाई हैं लाई हैं, ये ज्ञान का अमृत लाई हैं।। आई हैं......।।४।।

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