ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

Whatsappicon.png
Whatsappicon.png
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें |


पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा देश के समस्त जैन विद्वानों के लिए विशेष सैद्धांतिक विषयों पर ऋषभगिरि-मांगीतुंगी से विद्वत प्रशिक्षण शिविर का पारस चैनल पर ४ दिसंबर २०१६- रविवार से सीधा प्रसारण चल रहा है | घर बैठे देखकर अवश्य ज्ञान लाभ लें |

आओ रे आओ, खुशियाँ मनाओ, यह है मंगल बेला

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

[सम्पादन]
आओ रे आओ

तर्ज—माई रे माई......

आओ रे आओ, खुशियाँ मनाओ, यह है मंगल बेला।

मेरे घर का, कण-कण पावन, गुरु चरणों से बनेगा।
बोलो जय जय जय, बोलो जय जय जय।।टेक.।।
बड़े पुण्य से गुरुओं के, आहार का अवसर आता,
साधु मुनी आर्यिका को, भक्ती से पड़गाया जाता,
चौक बनाकर घर के आगे.......
चौक बनाकर घर के आगे, लगा भक्ति का मेला,
मेरे घर का, कण-कण पावन, गुरु चरणों से बनेगा।
बोलो जय जय जय, बोलो जय जय जय।।१।।
निरन्तराय आहार कराकर, मन में खुशी हुई है,
मानो आज मुझे कोई, निधि ही अनमोल मिली है,
जय-जयकार करो अब गुरु की.......
जय-जयकार करो अब गुरु की, अवसर बड़ा रंगीला,
मेरे घर का, कण-कण पावन, गुरु चरणों से बनेगा।
बोलो जय जय जय, बोलो जय जय जय।।२।।
यह आहार की महिमा, शास्त्रों में बतलाई जाती,
पंचाश्चर्य वृष्टि करने, देवों की टोली आती,
भोजन भी अक्षय हो जाता.......
भोजन भी अक्षय हो जाता, उस दिन उस चौके का,
मेरे घर का, कण-कण पावन, गुरु चरणों से बनेगा।
बोलो जय जय जय, बोलो जय जय जय।।३।।
शक्ती के अनुसार दान दे, अपना पुण्य बढ़ाओ,
इस अवसर पर अपने घर में, मंगलाचार कराओ,
जीवन मंगलमयी सदा हो.......
जीवन मंगलमयी सदा हो, अपना और सभी का,
मेरे घर का, कण-कण पावन, गुरु चरणों से बनेगा।

बोलो जय जय जय, बोलो जय जय जय।।४।।