ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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आचार्य श्री शांतिसागर विधान

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आचार्य श्री शांतिसागर विधान के विषय में
प्रकाशक दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान, जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर
लेखक गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी
पुस्तक के विषय में भगवान महावीर जन्मभूमि कुण्डलपुर में वी.नि. सं. २५३०, आषाढ़ वदी छट्ठ, ८ जून २००४ में यह विधान लिखा। ‘गुरूणां गुरु’ चारित्रचक्रवर्ती आचार्यश्री शांतिसागर जी महाराज बीसवीं सदी के प्रथम आचार्य हुए हैं। पूज्य माताजी ने तीन बार इनके दर्शन किये। इनका अनुवभ ज्ञान प्राप्त किया एवं वुुंâथलगिरि सिद्धक्षेत्र पर इनकी सल्लेखना देखी है। इस विधान में २१६ अघ्र्य, १ पूर्णाघ्र्य और १ जयमाला है।
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