ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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आज अभिनन्दन करना है, मातपद वन्दन करना है

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आज अभिनन्दन करना है

तर्ज—कभी कुण्डलपुर जाना है......

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आज अभिनन्दन करना है, मातपद वन्दन करना है,
ज्ञान का अर्चन करना है, चरण में चर्चन करना है।
इस ज्ञान की गंगा में अवगाहन करना है।
इस सरस्वती प्रतिमा को शत वंदन करना है।। आज......।। टेक.।।
तीर्थंकर की धरती पर, जन्मी है यह मैना।
छोटेलाल, मोहिनी माँ को, तज आई कह मैं ना।
तज आई कह मैं ना।।
श्री गणिनी ज्ञानमती का अभिवंदन करना है।
इस सरस्वती प्रतिमा को शत वंदन करना है।। आज......।।१।।
ज्ञानमती माँ पहली, इस युग की ये कहलार्इं।
इनकी कृतियों ने जग में, नारी की क्रान्ति दिखाई।
नारी की क्रांति दिखाई।।
इस ब्राह्मी माता का, अभिवन्दन करना है।
इस सरस्वती प्रतिमा को, शत वन्दन करना है।। आज......।।२।।
हस्तिनागपुर उनकी, है तपोभूमि कहलाई।
जम्बूद्वीप बनाकर जहाँ पर, ज्ञान की ज्योति जलाई।
ज्ञान की ज्योति जलाई।।
इस शारद माता का, अभिवन्दन करना है।
‘चंदनामती’ का वन्दन माता, स्वीकृत करना है।। आज......।।३।।

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