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प्रतिदिन पारस चैनल पर पू॰ श्री ज्ञानमती माताजी षट्खण्डागम ग्रंथ का सार भक्तों को अपनी सरस एवं सरल वाणी से प्रदान कर रही है|

प.पू.आ. श्री चंदनामती माताजी द्वारा जैन धर्म का प्रारंभिक ज्ञान प्राप्त करें | 6 मई 2018 से प्रतिदिन पारस चैनल के सीधे प्रसारण पर प्रातः 6 से 7 बजे तक |

आत्मज्ञान :

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आत्मज्ञान :

कह सो घिप्पई अप्पा ?

पण्णाए सो उ घिप्पए अप्पा।

—समयसार : २९६

यह आत्मा किस प्रकार जाना जा सकता है ? आत्म प्रज्ञा अर्थात् भेद विज्ञान रूप बुद्धि से ही जाना जा सकता है।