ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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आत्मदर्शन :

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आत्मदर्शन :

जो अप्पाणि वसेइ, सो लहु पावइ सिद्धि सुहु।
—योगसार : ६५

जो निज आत्मा में वास करता है, वह शीघ्र ही सिद्धि—सुख को प्राप्त करता है।