वीर निर्वाण संवत 2544 सभी के लिए मंगलमयी हो - इन्साइक्लोपीडिया टीम

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22 अक्टूबर को मुंबई महानगर पोदनपुर से पू॰ गणिनी ज्ञानमती माताजी का मंगल विहार मांगीतुंगी की ओर हो रहा है|

आत्मदर्शन :

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आत्मदर्शन :

जो अप्पाणि वसेइ, सो लहु पावइ सिद्धि सुहु।
—योगसार : ६५

जो निज आत्मा में वास करता है, वह शीघ्र ही सिद्धि—सुख को प्राप्त करता है।