ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

Whatsappicon.png
Whatsappicon.png
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें |


पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा देश के समस्त जैन विद्वानों के लिए विशेष सैद्धांतिक विषयों पर ऋषभगिरि-मांगीतुंगी से विद्वत प्रशिक्षण शिविर का पारस चैनल पर ४ दिसंबर, रविवार से ११ दिसंबर २०१६, रविवार तक प्रातः ६ बजे से ७ बजे तक सीधा प्रसारण होगा | घर बैठे देखकर अवश्य ज्ञान लाभ लें |

आदिनाथ स्वामी का जनमस्थान है

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


[सम्पादन]
आदिनाथ स्वामी का जनमस्थान है

Scan Pic0014666166.jpg


तर्ज—काली तेरी चोटी है......

आदिनाथ स्वामी का जनम स्थान है।

अयोध्यापुरी में देखो वैसी धूमधाम है।।

सारा जग करता जिनके चरणों में नमन,

तीर्थंकर हैं प्रथम।। टेक.।।

पिता नाभिराय मरुदेवी के महल में।

आये थे ऋषभदेव महाप्रभु बनके।।

बजी थी बधाई मरुदेवी आंगन,

तीर्थंकर हैं प्रथम।।१।।

शचि इन्द्राणी का भाग्य खिला था।

जिन्हें प्रभुजी का पहला दर्श मिला था।।

मायामयी बालक को सुलाया माँ के पास में।

माताजी को निद्रामग्न कर दिया आपने।।

इन्द्र हुआ प्रभुजी को देखके मगन,

तीर्थंकर हैं प्रथम।।२।।

पांडुकशिला पे, प्रभु न्हवन किया था।

क्षीरसागर से प्रासुक, जल को भरा था।।

शचि ने फिर उनको, सजाया था खुशी से।

पालने में प्रभु को, झुलाया था खुशी से।।

इन्द्र करे ताण्डव, नृत्य वहाँ झूम के।

सभी ‘‘चन्दनामती’’ भक्ती में विभोर थे।।

नाभिराय नगरी में लुटाते थे रतन,

तीर्थंकर हैं प्रथम।।३।।

Xcz9.jpg