ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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आपकी हथेली का मणिबंध बता देता है आप भाग्यशाली हैं या नहीं

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आपकी हथेली का मणिबंध बता देता है आप भाग्यशाली हैं या नहीं

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हाथों की रेखाओं और बनावट से भविष्य जानने की विद्या को हस्तरेखा ज्योतिष कहते हैं। हस्तरेखा विद्या का इतिहास काफी प्राचीन है और आज भी यह ज्योतिष के सबसे प्रामाणिक विद्याओं में से एक है। हथेली की रेखाओं और बनावट का गहनता से अध्ययन किया जाए तो किसी भी व्यक्ति के विषय में कई गुप्त बातें भी आसानी से मालूम की जा सकती हैं। यहां जानिए हथेली में मणिबंध देखकर किन बातों को मालूम किया जा सकता है।

कहां होता है मणिबंध- हमारे हाथ में हथेली जिस स्थान से प्रारंभ होती है, वहां आडी अवस्था में कुछ रेखाएं होती हैं, इन्हीं रेखाओं को मणिबंध कहा जाता है। हथेली का ये हिस्सा भी व्यक्ति की उम्र और भाग्य से जुड़ी कई बातें प्रकट कर देता है। हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार मणिबंध देखकर व्यक्ति की संभावित उम्र का आंकलन भी किया जा सकता है।

जानिए मणिबंध कौन—कौन सी बातें बता देता है....... — यदि किसी व्यक्ति की हथेली का यह भाग भरा हुआ हो, मांसल हो, यहां कलाई की हड्डी दिखाई नहीं देती हो तो यह शुभ लक्षण होता है। ऐसी हथेली कलाई के साथ मजबूती के साथ जुड़ी हुई दिखाई देता है मणिबंध का भाग सुंदर दिखाई देता है तो यह व्यक्ति को भाग्यशाली बनाता है।

मणिबंध में एक रेखा हो तो- यदि किसी व्यक्ति की हथेली के मणिबंध में सिर्फ एक ही रेखा हो और वह श्रेष्ठ गुणों वाली है तो यह भी शुभ लक्षण होता है। यहां शुभ लक्षण का अर्थ है कि मणिबंध की रेखा कलाई के चारों ओर हो और उसमें जौ के आकार के यव की लडियां हों और रेखा खंडित ना हो तो व्यक्ति जीवन में कई उल्लेखनीय कार्य करता है। इन्हें धन संबंधी सुख भी प्राप्त होते हैं।

उम्र: मणिबंध में एक रेखा शुभ लक्षण वाली हो तो व्यक्ति की उम्र करीब ३० वर्ष तक की हो सकती है। जबकि अशुभ लक्षण होने पर उम्र में और कमी आने की संभावनाएं रहती हैं। मणिबंध की एक रेखा होने पर व्यक्ति अल्पायु हो सकता है।

यदि किसी व्यक्ति की हथेली में मणिबंघ का हिस्सा ढीला और लटकता हुआ दिखाई देता है तो यह अशुभ लक्षण होता है। मणिबंध का हिस्सा सुंदर ना हो और हथेली को हिलाने से कुछ आवाज होती हो, हथेली और कलाई का जोड़ मजबूत नहीं दिखाई देता हो तो यह व्यक्ति के दुर्भाग्य का सूचक है। पुराण के अनुसार यदि मणिबंध में हड्डियां दिखाई नहीं देती हैं और कलाई तथा हथेली का जोड़ मजबूत है तो यह सौभाग्य का प्रतीक माना गया है। इसके विपरीत मणिबंध होने पर व्यक्ति को जीवन में कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है और दुर्घटना के भी योग बनते हैं।

सभी लोगों के हाथों की मणिबंध में रेखाओं की संख्या अलग—अलग होती है। किसी व्यक्ति के हाथ में मणिबंध की एक रेखा होती है, किसी के हाथ में दो या किसी के हाथ में तीन रेखाएं भी होती हैं।

यदि मणिबंध में तीन रेखाएं हों तो- यदि किसी व्यक्ति की हथेली के मणिबंध में तीन रेखाएं हों और वे रेखाएं कहीं से टूटी हुई ना हो और कलाई के चारों ओर हों, रेखाओं में जौ के आकार की लड़ियाँ बनी दिखायी देती हों तो ऐसी रेखाएं व्यक्ति को भाग्यशाली बनाती हैं। ऐसा मणिबंध होने पर व्यक्ति किसी राजा के समान सुख प्राप्त करता है। इनके जीवन में किसी प्रकार के सुख की कमी नहीं होती और इनका जीवन ऐश्वर्य पूर्ण होता है।

ध्यान रखें मणिबंध में तीन रेखाएं होना ही शुभ लक्षण नहीं माना जा सकता है। यदि मणिवंध में तीन रेखाएं हों और वे टूटी हुई दिखाई देती हैं तो यह अशुभ लक्षण होता है। ऐसी रेखाएं जिन लोगों के हाथ में होती हैं, वे कठिन परिश्रम के बाद ही कुछ सफलता या सकारात्मक फल प्राप्त कर पाते हैं। इनके लोगों के जीवन में संघर्ष अधिक होता है।

उम्र मणिबंध में तीन रेखाएं शुभ लक्षण वाली हो तो व्यक्ति की उम्र करीब ७० से ८५ वर्ष तक की हो सकती है। जबकि अशुभ लक्षण होने पर उम्र में कमी आने की संभावनाएं रहती है।

मणिबंध में दो रेखाएं हो तो यदि किसी व्यक्ति की हथेली में मणिबंध की दो रेखाएं हों, वे अखंडित हों , जौ के आकार के यव वाली लडियों वाली हों, कलाई के चारों और हों तो यह भी शुभ लक्षण होता है। ऐसे लोग किसी राजा के मंत्री हो सकते हैं । इनके जीवन में भी सभी सुख—सुविधाएं रहती हैं। यदि किसी व्यक्ति की हथेली में मणिबंध की दो रेखाएं हैं और यहां बताए गए शुभ लक्षण नहीं हैं तो वे रेखाएं यही बताती हैं कि व्यक्ति को जीवन में कठिन परिश्रम करना होगा।

उम्र मणिबंध में दो रेखाएं शुभ लक्षण वाली हों तो व्यक्ति की उम्र करीब ४५ से ५५ वर्ष तक की हो सकती है। जबकि अशुभ लक्षण होने पर उम्र में कमी आने की संभावनाएं रहती हैं ।

ये बातें भी हैं जरूरी- भाग्यशाली होने केलिए मणिबंध में रेखाएं होना ही पर्याप्त नहीं है। बल्कि रेखाएं सुंदर यवमाला से युक्त होनी चाहिए। जौ के आकार के यव परस्पर एक—दूसरे से जुड़े हुए दिखाई देना चाहिए। यदि यव छोटे—बड़े हैं तो शुभ प्रभावों में कमी आ सकती है या शुभ प्रभाव खत्म भी हो सकते हैं। साथ ही, मणिबंध की रेखाएं कलाई के चारों ओर होनी चाहिए। यदि कलाई के चारों ओर मणिबंध की रेखाएं नहीं हैं तो शुभप्रभावों में कमी आने की पूरी संभावनाएं हैं।

मणिबंध के साथ ही हथेली में अन्य रेखाओं का अध्ययन करना भी जरूरी है। दूसरी रेखाओं के शुभ अशुभ प्रभाव से मणिबंध के प्रभाव बदल भी सकते हैं ।

यदि व्यक्ति की हथेली में जीवन रेखा अच्छी स्थिति में ना हो और मणिबंध शुभ लक्षण वाला है तो व्यक्ति को भाग्य का साथ मिलता है, लेकिन स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना पड़ता है।


हस्तिनापुर टाइम्स
२४ नवम्बर २०१४