ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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इस मंत्र की जाप्य दो दिन 16 और 17 तारीख को करे |

सोलहकारण व्रत की जाप्य - "ऊँ ह्रीं अर्हं संवेग भावनायै नमः"

आरती संग्रह

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आरती संग्रह-( १ नं. से २१ नं. तक )


यह विधि मंगल आरति कीजे-आरती नं १

ओम जय चंद्र प्रभु देवा -आरती नं २

ओम जय महावीर प्रभो -आरती नं ३

ओम पारस देवा -आरती नं ४

ओम जय सिद्ध चक्र देवा -आरती नं ५

आरती श्री पदम तुम्हारी -आरती नं ६

ओम जय श्री शांति प्रभो -आरती नं ७

भक्ति भाव लेकर-आरती नं ८

करते हैं प्रभु की आरती -आरती नं ९

जय जय महावीर जय जय महावीर-आरती नं १०

जयति जय जय आदि जिनवर-आरती नं ११

ओम जय जम्बूदीप जिनम -आरती नं १२

मै तो आरति उतारूँ रे-आरती नं १३

मै तो आरती उतारूँ रे कैलाश गिरिवर की ...-आरती नं १४

प्रभु आरति करने से सब आरत टलते हैं...-आरती नं १५

भगवान चन्द्रप्रभु की आरती -आरती नं १६

ए़ही विधि मंगल -आरती नं १7

चौबीस दीपों की थाल आरती -आरती नं १8

जय चंद्रा प्रभु देव आरती -आरती नं 19

आरती शांति तुम्हारी -आरती नं २0

जय जिन राजा आरती -आरती नं २1