ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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आर्यिका श्री स्वर्णमती माता जी

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नवदीक्षित आर्यिका श्री स्वर्णमती माताजी का परिचय

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पूर्व नाम कु. दीपा जैन (कु. स्वाति जैन)

जन्म दिनाँक २७ मार्च १९७०, चैत्र कृष्णा चतुर्थी

जन्मस्थान नजीबाबाद (जि.-बिजनौर) उ.प्र.

माता-पिता श्रीमती सरोज जैन एवं श्री शीतल प्रसाद जैन, नजीबाबाद

शैक्षणिक योग्यता

  1. M.Sc.(बायोसाइंसेज-बायोटेक्नोलॉजी) : रुड़की विश्वविद्यालय (वर्तमान IIT); विशेष योग्यता सहित उत्तीर्ण (78% से अधिक अंक)
  2. एन.सी.ई.आर.टी. (NCERT) -दिल्ली में रिसर्च एसोसिएट (दो वर्ष हेतु)
  3. CPMT (Combined Pre Medical Test-U.P.), GATE (Graduate Aptitude Test in Engineering), Prelims of UPPCS(Provincial Civil Services UP) आदि परीक्षाएँ उत्तीर्ण कीं।
  4. सदैव प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण, १२वीं कक्षा में ‘बेस्ट स्टूडेंट अवार्ड’ आदि।
  5. विद्यार्थी जीवन में भाषण, अभिनय, कविता लेखन इत्यादि में भाग लेना।

'आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत १९ जुलाई १९८७, पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी से (ब्र. कु. माधुरी शास्त्री सम्प्रति पूज्य प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी की प्रेरणा से)

'संघ में प्रवेश एवं दो प्रतिमा के व्रत १९ अक्टूबर, १९९९

'गृहत्याग १ मार्च २०००, फाल्गुन कृ. एकादशी

'सप्तम प्रतिमा के व्रत १० नवम्बर २००७, कार्तिक शु. एकम्

'आर्यिका दीक्षा आषाढ़ शुक्ला दशमी, शुक्रवार-२९ जून २०१२ को जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर में पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के करकमलों से।

'धार्मिक अध्ययन छहढाला, रत्नकरण्ड श्रावकाचार, द्रव्य संग्रह, तत्त्वार्थसूत्र, गोम्मटसार जीवकाण्ड, गोम्मटसार कर्मकाण्ड, कातंत्रव्याकरण, पुरुषार्थसिद्ध्उपाय, ज्ञानार्णव, पद्मनंदिपंचविंशतिका, आदिपुराण, उत्तरपुराण, मूलाचार, समयसार आदि।

'साहित्यिक योगदान लार्ड महावीर एण्ड धर्मतीर्थ पुस्तक (अंग्रेजी अनुवाद, २००१), भगवान महावीर हिन्दी-अंग्रेजी जैन शब्द कोश (प्रबंध संपादिका, २००४), कुण्डलपुर अभिनंदन ग्रंथ (सम्पादक मण्डल में, २००४), गणिनी ज्ञानमती गौरव ग्रंथ (सम्पादक मण्डल में, २००६), दॉ गोल्डन पर्सनेल्टी ऑफ गणिनी ज्ञानमती माताजी (अंग्रेजी पुस्तिका, २००६), बाल विकास (अंग्रेजी) भाग-२ (संपादिका, २००६), जैन भारती ग्रंथ-अंग्रेजी (संशोधन एवं संपादन, २००७), जम्बूद्वीप दर्शन (अंग्रेजी अनुवाद, २०१०)।

'अन्य विशेष सन् २००० से २००४ तक प्रचार संयोजिका (संघ) तथा जैन पत्र-पत्रिकाओं एवं ‘सम्यग्ज्ञान’मासिक पत्रिका में समाचार, लेख इत्यादि का लेखन। सन् २००५ से पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के विविध टी.वी. चैनलों(आस्था, पारस आदि) पर प्रसारित प्रवचनों एवं कार्यक्रमों का संयोजन।