ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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इस मंत्र की जाप्य दो दिन 18 और 19 तारीख को करे |

सोलहकारण व्रत की जाप्य - "ऊँ ह्रीं अर्हं शक्तितस्त्याग भावनायै नमः"

आर्यिका १०५ श्री विशदमती माताजी

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आर्यिका श्री अमूर्तमती माताजी का संक्षिप्त-परिचय

पुर्व नाम - श्रीमति प्रमिलाबेन जी

माता - श्रीमति इच्छाबेन जी

पिता - श्री कान्तिलाल जी

आजीवनब्रह्मचर्य व्रत - भाव नगर मे, आचार्य विराग सागर जी से

प्रतिमा व्रत - , २ प्रतिमा व्रत श्रवणबेलगोला मे आचार्य श्री १०८ वर्धमान सागर जी से

क्षुल्लिका दीक्षा - सन् २०१०,कुन्थलगिरी मे, ( आर्यिका श्री प्रशान्तमति माता जी से)

आर्यिका दीक्षा - , २९।०४।२०१५ , किशनगढ़ मे आचार्य श्री १०८ वर्धमान सागर जी से