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पूज्य गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ससंघ ऋषभदेवपुरम्-मांगीतुंगी में विराजमान है ।

प्रतिदिन पारस चैनल के सीधे प्रसारण पर प्रातः 6 से 7 बजे तक प.पू.आ. श्री चंदनामती माताजी द्वारा जैन धर्म का प्रारंभिक ज्ञान प्राप्त करें |

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आश्रय :

नीया वि समत्थेहिं गहिया उच्चं लहंति संठाणं।

धूलिकणा पुहवीए चरंति गयणम्मि वाएण।।

—गाहारयणकोष : १२०

नीच व्यक्ति भी यदि बड़ों का सहारा लेते हैं तो ऊँचे पद तक पहुँच जाते हैं। जैसे पृथ्वी के धूलि—कण हवा का आश्रय पाकर आकाश में गमन करते हैं।