ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

Whatsappicon.png
Whatsappicon.png
ज्ञानमती नेटवर्क से जुड़ने के लिये ADD ME < मोबाइल नं.> लिखकर +91 7599002108 पर व्हाट्सएप पर मेसेज करें |


पूज्य गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा देश के समस्त जैन विद्वानों के लिए विशेष सैद्धांतिक विषयों पर ऋषभगिरि-मांगीतुंगी से विद्वत प्रशिक्षण शिविर का पारस चैनल पर ४ दिसंबर, रविवार से ११ दिसंबर २०१६, रविवार तक प्रातः ६ बजे से ७ बजे तक सीधा प्रसारण होगा | घर बैठे देखकर अवश्य ज्ञान लाभ लें |

आस्था देता है रास्ता

ENCYCLOPEDIA से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


[सम्पादन]
आस्था देता है रास्ता

334y.jpg
334y.jpg
334y.jpg
334y.jpg

क्या सच में आप अपनी जिंदगी को बदलना चाहते हैं । खुशियों की दौड़ में आगे बढ़ना चाहते हैं। जिंदगी के हर लम्हें को खुशहाल बनाना चाहते हैं। सबसे कुछ अलग करना चाहते हैं। इन सभी चीजों को हासिल करना चाहते हैं, आइये हमारे साथ कुछ टिप्स आपको दे रहा हूँ । आज की सच्चाई का आइना आपको दिखा रहा हूँ ।आइना देखकर पहचाने आप क्या हैं ? कर्ज और मर्ज से बचें। अपनी जिंदगी में खर्चा तभी बढ़ायें, जब कमाई बढ़ाई जा सके। कर्ज देने के लिए बैंक एवं फाइनेंस कंपनियां आपका इंतजार कर रही हैं। वे सिर्फ इंतजार नहीं कर रही, आपकी जमीन—जायदाद को गिरवी रखकर कर्ज दे रही हैं। चाणक्य ने नीति शास्त्र में लिखा है ’ आप व्यापार के लिए कितना भी कर्जा ले लो, मगर अपने रहने के निवास को कभी भी गारंटी या गिरवी मत रखो। क्योंकि वह तुम्हारे अकेले की सम्पत्ति नहीं है। पूरे परिवार के रहने की जगह है।’ सुजान पुरूषों को इस मुख्य नियम का पालन करना चाहिए।

इंटरनेट पर सभी जानकारियां उपलब्ध हैं, अध्ययन करें। विशेषज्ञ (एक्सपर्ट) इंटरनेट पर उपलब्ध हैं एवं कृपया उन्हीं की सलाह लें। अपने कदम सफलता की ओर बढ़ायें। कर्ज लिए हुए पैसे का ब्याज २४ घंटे चलता है और आपका व्यापार १०—१२ घंटा चलता है। कर्ज लेने के पहले हजारों बार सोचें तभी कर्ज लें। सलाहाकारों की फौज से अपने आपको बचायें । हिन्दूस्तान में मुफ्त की सलाह देने वालों की लाइन लगी है। हर आदमी आपका सलाहकार बनना चाहता है। आपकी जीत का अवार्ड लेने के लिए सभी तत्पर हैं।

कर्ज लेने के पहले कर्ज क्यों लेना चाहते हैं सोचें। कर्ज लेने के बाद व्यापार की परिस्थिति क्या होगी? पैसा लगाने के बाद व्यापारिक परिस्थिति में कितना बदलाव आएगा ? सरकारी नियमों में क्या लाभ मिल सकता है? आपके व्यापारिक सलाहकार (बिजनेस कोच) की क्या सलाह है? प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने वाले सलाहकार से सलाह लें, सी.ए. से सलाह लें। एक प्रतिभाशाली फाइनेंय कंट्रोलर नियुक्त करें। फाइनेंस कंट्रोरल किसे कहते हैं, जो बैंक या मार्केट से फाइनेंस लाकर समय से रिपेमेन्ट कर सके उसे ही फाइनेंस कंट्रोलर कहते हैं। यह सब सलाह लेने के बाद परमात्मा तुल्य माता—पिता का आशीर्वाद लेकर श्री गणेश करें। पहला कदम कामयाबी की ओर बढाये। जीत उसी की होती है, जो जीतना जानता है, जो जीतने की इच्छा रखता है। उपयुक्त कार्य करने के बाद व्यापार में सफलता मिलना कोई बड़ी बात नहीं है। सफल व्यापारी बन जाते हैं। सपने साकार हो जाते हैं। इतने खुश रहे कि दूसरे जब भी आपको देखें तो वे भी खुश हो जाएं—अज्ञात व्यापार के मुख्य नियमों का पालन करने के बाद सफलता निश्चित ही मिलती है। सफलता पाने में कोई कठिनाइयां नहीं होती । सफलता को संभाल कर रखने वाले सुजान पुरूष कम ही होते हैं। सफलता का नशा मद्य के नशे से भी ज्यादा खतरनाक होता है। मद्य का नशा तो ६—८ घंटे में उत्तर जाता है। सफलता का नशा स्वाभिमान में बदलकर अभिमान में बदल जाता है। अभिमान जब ख्याति की ओर बढ़ता है और खतरनाक हो जाता है। स्वााqभमान की ख्याति अपने आप फैलती है। अभिमान अपनी ख्याति फैलाने के लिए लक्ष्मी का अपव्यय करता है। स्वयं को स्वयंभू समझने लगता है। क्लब, संस्था एवं पार्टियों में अपने को व्यस्त कर लेता है। व्यापार से पकड़ कम होती जाती है। व्यापार से पैसा निकालकर अपने ऐश, आराम और ख्याति लाभ में लगा देता है। यहीं से होती है व्यापार के पतन की शुरूआत।

दूसरी मुख्य भूमिका शुरू होती है फाइनेंस कंट्रोलर की। फाइनेंस देने वाले एजेन्ट दिनभर आते ही रहते हैं। फाइनेंस लेना या नहीं लेना फाइनेंस कंट्रोलर पर निर्भर करता है। पुनर्भुगतान के लिए कोई चार्ट बनाकर फाइनेंस लोन लेती है वह कंपनियां सदैव सफल रहती हैं। इसके विपरीत फाइनेंस कंट्रोलर सिर्फ फाइनेंस लाना जानता है,भविष्य में उसका भुगतान कैसे होगा, वह नहीं जानता। वह फाइनेंस कंट्रोलर कहलाने का हकदार नहीं होता। उसको फाइनेंस एजेन्ट की संज्ञा दी जाती है। फाइनेंस कंट्रोलर के मजबूत होने से कंपनी दिन पर दिन आसमान छूती है। इसके विपरीत फाइनेंस कंट्रोलर अगर एजेन्ट बन जाता है, सिर्फ पैसे लाकर देता रहता है तो कंपनी का पतन निश्चित है। तीसरी भूमिका, टर्न—ओवर बढ़ाने के चक्कर में अपनी क्षमता से ज्यादा काम लेना। चौथी भूमिका, सलाहकारों से सलाह न लेना। पांचवी भूमिका, सभी विवाद में अपने दखलंदाजी रखना। छठी भूमिका, बातचीत, लेन—देन में समय के पाबंद न होना। जब बाड़ ही खेत को खतम करेगा, तो खेत को कौन बचायेगा ? उपरोक्त गलतियों के बाद व्यापार ठप्प हो जाता है। हर तरफ से परेशानियां आती हैं। मानव घबरा जाता है, बीमार पड़ जाता है, अपघात करने का प्रयास करता है, कृपया इन सबसे बचें। हमारे पास आइए, सब समाधान हमारे पास है। समाधान पाइए तीव्र गति से आगे बढ़ जाइये।

मैं आपसे पूछता हूँ जिंदगी में हार—जीत सबकी होती है। जीत के बाद हार और हार के बाद जीत होना स्वाभाविक है। पांच ख्याति प्राप्त विशेषज्ञों की एक टीम बनाइये। फैसले लेने में उनका सहयोग लीजिए। ऐसा ही सिकंदर ने किया था। उन्होंने अपने सेनापतियों की टीम बनायी थी। सिकंदर ने कितनी बार पराजय का मुंह देखकर विजय हासिल की थी। बल्ब बनाने वाले इंजीनियर ने भी ४० बार हार देखने के बाद बल्ब का निर्माण किया था, जो घबरा रहे हैं। याद कीजिए अपने आपको, जब आपने व्यापार की शुरुआत की थी। आपकी पूंजी क्या थी, आपका तजुर्बा क्याा था, आज आपके पास काम का तजुर्बा है, दुनिया की पहचान है, समय सिकंदर का बदल सकता है तो आपका क्यों नहीं। आप क्या सिकंदर से कम हो ? जिंदगी इम्तिहान लेती है, हारने वालों को जीतने का दोबारा मौका देती है । भय के भूत को भगाइये। हौंसले अगर बुलंद आसमां है आपके हाथ में। विश्व विजय करना चाहते हो, अपनी सोच पर पहले विजय प्राप्त करो। सोच बदलते ही संसार बदल जाता है। कर्मठ और ईमानदारी के साथ आप आगे बढ़ें, परमात्मा, प्रकृति आपका हाथ पकड़ने के लिए तैयार है। आपकी जीत निश्चित है, निश्चितहै, निश्चित है।

डॉ. सम्पत सेठी, हावडा
(वास्तु एवं निर्मोलॉजिस्ट)
परिणय प्रतीक , मासिक पत्र
फरवरी , २०१५