ऊँ ह्रीं श्री ऋषभदेवाय नम:।

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आस्रव त्रिभंगी-

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आस्रव त्रिभंगी के विषय में
प्रकाशक दिगम्बर जैन त्रिलोक शोध संस्थान, जम्बूद्वीप-हस्तिनापुर
लेखक गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी
पुस्तक के विषय में पाँच ाqमथ्यात्व आदि से आस्रव के ५७ भेद हैं। इन्हें चौदह गुणस्थान और मार्गणाओं में घटाया है और चार्ट भी दिये गये हैं। यह श्री श्रुतमुुनि की रचना है। माताजी ने सन् १९७३ में इसका अनुवाद किया है।
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